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क्यों शाम के IPL मैचों की दूसरी पारी में आसान हो जाती है बल्लेबाजी?

IPL मैचों में अक्सर यह देखा गया है कि शाम के मैचों की दूसरी पारी के दौरान कई बार टीम आसानी से बड़े लक्ष्य का भी पीछा कर लेती है। इसी वजह से, कई कप्तान शाम के मैचों में टॉस जीतने के बाद भी पहले गेंदबाजी करना ही चुनते हैं।

Devdutt Padikkal and Virat Kohli

देवदत्त पडिक्कल और विराट कोहली। (Photo Credit: IPL/X)

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इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के शाम के मैचों के दौरान अक्सर एक दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिलता है। इस ट्रेंड में देखा गया है कि दूसरी पारी में बैटिंग करना काफी आसान हो जाता है। IPL 2026 में भी यही पैटर्न देखने की उम्मीद है। इसका मुख्य कारण ओस है, जो रात के समय मैदान और गेंद दोनों को प्रभावित करती है। जिससे बल्लेबाजों के लिए बैटिंग करना आसान हो जाता है।

 

IPL के इतिहास में ओस सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय कारक रही है। जैसे-जैसे सूरज ढलता है और तापमान गिरता है, मैदान की घास पर नमी जमा होने लगती है। जो गेंद को गीला और फिसलन भरा बना देती है। यही कारण है कि शाम 7:30 बजे शुरू होने वाले मैचों में टॉस जीतना आधा मैच जीतने के बराबर माना जाता है।

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क्यों शाम में आसान हो जाती है बल्लेबाजी?

मैच का समय टॉस के फैसले में अहम भूमिका निभाता है। दोपहर 3:30 बजे शुरू होने वाले मुकाबलों में ओस का असर लगभग नहीं होता, इसलिए कप्तान अक्सर पहले बल्लेबाजी करना पसंद करते हैं। लेकिन शाम 7:30 बजे के मैचों में स्थिति बिल्कुल उलट होती है। यहां ओस के कारण दूसरी पारी में बल्लेबाजी आसान हो जाती है, इसलिए ज्यादातर टीमें टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला करती हैं। यही कारण है कि ऐसे मैचों में लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम का पलड़ा भारी रहता है।

 

ओस का सबसे ज्यादा असर गेंदबाजों पर पड़ता है। गीली गेंद पर पकड़ बनाना कठिन हो जाता है, जिससे तेज गेंदबाज अपनी लाइन और लेंथ खो बैठते हैं। वहीं स्पिन गेंदबाजों को टर्न नहीं मिल पाता, जिससे उनकी प्रभावशीलता कम हो जाती है। खासतौर पर डेथ ओवरों में जहां सटीक गेंदबाजी जरूरी होती है वहां गेंदबाजों के लिए हालात चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं।

 

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दूसरी पारी में बल्लेबाजों के लिए हालात काफी अनुकूल हो जाते हैं। गीली गेंद तेजी से बैट पर आती है, जिससे बड़े शॉट लगाना आसान हो जाता है। इसके अलावा फील्डिंग टीम भी दबाव में रहती है क्योंकि गीली गेंद के कारण कैच छूटने और मिसफील्ड की संभावना बढ़ जाती है। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम जैसे नमी वाले मैदानों पर यह असर और ज्यादा देखने को मिलता है।

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