नवजोत कौर ने बनाई भारत राष्ट्रीय पार्टी, उम्मीद से आशंका तक, हर सवाल का जवाब
नवजोत कौर सिद्धू ने भारतीय राष्ट्रीय पार्टी का एलान किया है। उनके पति नवजोत सिद्धू अभी तक कांग्रेस में बने हुए हैं।

नवजोत कौर सिद्धू। Photo Credit: PTI
पंजाब कांग्रेस से निष्कासित नेता नवजोत कौर सिद्धू ने अपनी नई पार्टी बना ली है। उन्होंने पार्टी का नाम 'भारतीय राष्ट्रीवादी पार्टी' रखा है। हिंदी में इस पार्टी का नाम भा.र.पा. रखा है। पंजाब की यह नई नवेली पार्टी, ऐसे वक्त में शुरू हुई है, जब सिद्धू दंपति की राजनीति मुश्किलों से गुजर रहा है। कांग्रेस ने उन्हें हाशिए पर रखा है, आम आदमी पार्टी में गुंजाइशें कम हैं और भारतीय जनता पार्टी ऑफर नहीं दे रही है।
नवजोत कौर को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर आरोप लगाना भारी पड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य कांग्रेस के कई बड़े चेहरे भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए कांग्रेस पार्टी ने फरवरी 2026 में निकाल दिया था। उन पर अनुशासनहीनता के आरोप लगे थे। उनके पति नवजोत सिद्धू, पहले ही सक्रिय राजनीति से दूर हैं, जबकि वह राज्य के सबसे चर्चित नेताओं में से एक रहे हैं।
यह भी पढ़ें: रूठीं, सस्पेंड हुईं, अब इस्तीफा, नवजोत कौर ने क्यों छोड़ दी कांग्रेस? वजह समझिए
नवजोत कौर:-
जिस घोषणा का बेसब्री से इंतजार था, वह अब सामने है। हमने राजनीतिक नेताओं के मौजूदा कामकाज के स्तर को ध्यान से देखने और समीक्षा करने के बाद, राष्ट्रीय स्तर पर एक नए विकल्प पर काम करना शुरू किया है। हम बस अपना जीवन अपने देश को समर्पित करना चाहते हैं। लोगों को वह सब लौटाना चाहते हैं जिसके वे सचमुच हकदार हैं और जिसकी वे हमसे उम्मीद करते हैं। यह एक ईश्वरीय हस्तक्षेप है जिसने कुछ ऐसे समान सोच वाले लोगों को एक साथ ला दिया है, जिनके पास हर राज्य में काम करने की क्षमता, आत्मविश्वास, साहस और दृढ़ संकल्प है।
वादे क्या हैं?
- पंजाब को स्वर्ण राज्य बनाने का वादा
- पंजाब की खोई पहचान वापस दिलाने की कवायद
- न्याय, समानता और स्वतंत्रता के मूल्यों पर जोर
- आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रयास
- ज्यादा लोकतांत्रिक सरकार बनाने की कोशिश
कांग्रेस ने क्यों निकाला था?
नवजोत कौर ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद हासिल तब होता है, जब 500 करोड़ की अटैची पहुंचाई जाती है। उन्होंने कहा था कि सिद्धू परिवार के पास 500 करोड़ रुपये वाली अटैची नहीं है, अगर कांग्रेस, मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करे तो सिद्धू सियासत में सक्रिय होंगे। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और सुखजिंदर सिंह रंधावा पर उन्होंने टिकट बेचने का आरोप लगाया था। उन्हें कांग्रेस ने 8 दिसंबर को निलंबित कर दिया था।
यह भी पढ़ें: नवजोत कौर हों या सुखबीर बादल, सब राजा वड़िंग के पीछे क्यों पड़ गए?
नई पार्टी बनाने की कवायद क्यों?
नवजोत कौर सिद्धू ने पंजाब चुनाव में अकेले उतरने का फैसला किया है। उनके पति अभी कांग्रेस से औपचारिक तौर पर बाहर नहीं हुए हैं। वह राजनीतिक मंचों पर न के बराबर नजर आते हैं। नवजोत कौर का कहना है कि वह ईश्वरीय प्रेरणा से राजनीति में नई पार्टी के साथ उतर रहीं हैं। उनका कहना है कि कुछ लोग, जिनकी विचारधारा एक जैसी है, वे साथ आए हैं। देश और पंजाब की अब सेवा सामूहिक तौर पर की जाएगी। उनका कहना है कि वह शिक्षित हैं, शिक्षा की कद्र करती हैं और समाज की सेवा की जाएगी।
कैसा रहा है करियर?
नवजोत कौर, साल 2012 में अमृतसर पूर्व विधानसभा सीट से विधायक थीं। वह तब भारतीय जनता पार्टी में थीं। साल 2017 में वह बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गईं। कांग्रेस में नवजोत सिद्धू, कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार में मंत्री बने, उनकी पत्नी भी मंत्री बनीं लेकिन ज्यादा दिनों तक यह सिलसिला चला नहीं। कैप्टन सिंह के साथ उनका टकराव, दिन प्रति दिन बढ़ता रहा।
क्यों अचानक बनाई है पार्टी?
पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव वाले हैं। एक साल का वक्त बचा है। नवजोत सिंह सिद्धू जनाधार वाले नेता रहे हैं। अपनी विधानसभा और लोकसभा सीटों से जीतते रहे हैं। उन्होंने यह तो साफ कर दिया है कि पार्टी, राष्ट्रवादी नजरिए पर जोर देगी। वह पंजाब के गौरव को लौटाने की बात कर रही हैं, उनका कहना है कि वह एक बार फिर 'स्वर्णिम पंजाब' की दिशा में काम करेंगी। नवजोत कौर ने यह भीदावा किया है कि उनकी सरकार, लोगों के द्वारा, लोगों के लिए होगी। बाहरी दखल न के बराबर होगा। पार्टी का जोर, न्याय, प्रेम, शांति, स्वतंत्रता और आध्यात्मिक विकास पर जोर देगी। उन्होंने कहा है कि वह 'वाहे गुरु जी' के दिखाए राह पर चलेंगी।
https://twitter.com/NavjotSidh42212/status/2041191974347194474
सिद्धू को उम्मीद क्यों है?
नवजोत कौर, पंजाबी समुदाय से आती हैं। नवजोत सिंह सिद्धू, चर्चित शख्सियत हैं। क्रिकेटर और एंटरटेनर रहे हैं तो लोग उन्हें खूब सुनते हैं। जहां जाते हैं लोग उमड़ पड़ते हैं। अपनी इसी लोकप्रियता के दम पर वह दशकों तक राजनीति में सक्रिय रहे। पंजाब में वह कांग्रेस अध्यक्ष के पद तक गए। पंजाब में 117 विधानसभा सीटे हैं। 92 सीटों पर आम आदमी पार्टी के विधायक हैं।
कांग्रेस के पास 18 सीटें हैं, शिरोमणि अकाली दल के पास 3 सीटें हैं, निर्दलीय और अन्य के पास 2 सीटें हैं। पंजाब में भारतीय जनता पार्टी अकाली से अलगाव के बाद कमजोर हो गई है। सिद्धू, राष्ट्रवादी राजनीति करने का एलान कर रही हैं, ऐसे में हो सकता है कि बीजेपी समर्थक भी उनसे जुड़ें। अगर वह सभी सीटों पर दावेदारी ठोकती हैं तो बीजेपी और अकाली को और नुकसान हो सकता है।
आशंका क्या है?
नवजोत सिंह सिद्धू, पंजाब में करीब 4 साल से सक्रिय नहीं हैं। जेल से आने के बाद वह राजनीति कार्यक्रमों से बचते नजर आए हैं। वह परिवार, कपिल शर्मा शो और मैच की कमेंट्री करते तो नजर आए हैं लेकिन जनसभा करते नहीं। राजनीतिक निष्क्रियता, उनका खेल बिगाड़ सकती है। अभी तक, उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा भी नहीं दिया है।
और पढ़ें
Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies
CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap



