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MGNREGA का नाम बदलने की तैयारी, कांग्रेस से दूरी बना रहे शशि थरूर किस तरफ हैं?

मनरेगा की जगह VB-G RAM G बिल लाने पर शशि थरूर ने विरोध किया है और उन्होंने उसकी वजहें बताई हैं। उन्होंने इसे दुखद और गलत कदम बताया।

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शशि थरूर Photo Credit: PTI

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लोकसभा में मंगलवार को बड़ा हंगामा हुआ जब केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की जगह पर नया बिल 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल 2025' को लाने की कोशिश की। इस बिल को शॉर्ट फॉर्म में VB-G RAM G बिल या G-RAM-G बिल कहा जा रहा है।

 

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस बिल का जोरदार विरोध किया। उन्होंने इसे 'बहुत दुखद और गलत कदम' बताया। थरूर ने कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना सही नहीं है। 'राष्ट्रपिता का नाम हटाने का फैसला गलत है। यह सिर्फ नाम बदलना नहीं है, बल्कि ग्रामीण रोजगार योजना की आत्मा और गांधीजी के विचारों पर हमला है।'

 

यह भी पढ़ेंः मनरेगा के नाम के साथ ऐसा क्या बदला कि VB G RAM G विधेयक पर भड़का विपक्ष?

 

थरूर ने संसद में कहा कि गांधीजी का 'राम राज्य' का सपना सिर्फ राजनीतिक नहीं था, बल्कि गांवों को मजबूत बनाने और ग्राम स्वराज का सामाजिक-आर्थिक योजनी थी। मनरेगा में गांधीजी का नाम रखना उनके विचारों से गहरा जुड़ाव दिखाता था। अब नाम हटाना योजना की नैतिक ताकत और इतिहास को कमजोर करता है।

दो भाषा से मिलकर बना

थरूर ने बिल के नाम पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि नाम में दो भाषाएं मिलाकर सिर्फ 'G RAM G' बनाने की कोशिश संविधान के आर्टिकल 348 का उल्लंघन है। फिर उन्होंने बचपन की एक गाने की लाइन गाकर कहा, 'राम का नाम बदनाम मत करो।'

 

 

बिल पेश करने वाले केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह नया कानून 'विकसित भारत 2047' के सपने से जुड़ा है। इसमें ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन का गारंटी वाला मजदूरी का काम मिलेगा (मनरेगा में 100 दिन थे)। 

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाएगा

नए कानून में पानी की सुरक्षा, ग्रामीण सड़कें, आजीविका से जुड़ी सुविधाएं और मौसम की मार से बचाव के कामों पर जोर होगा। सभी कामों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाएगा ताकि बेहतर योजना बने।

 

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इसे मनरेगा का 'बड़ा अपग्रेड' बताया। इसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर योजना पर ध्यान दिया गया है।

 

लेकिन विपक्ष ने इसका विरोध किया। कांग्रेस ने कहा कि यह अधिकार-आधारित योजना को कमजोर करेगा और गांधीजी के विचारों का अपमान है। लोकसभा में हंगामा हुआ और विपक्षी सांसदों ने नारे लगाए। यह बिल ग्रामीण भारत के लाखों गरीब परिवारों को प्रभावित करेगा।

प्रियंका गांधी ने भी किया विरोध

विपक्ष ने इस प्रस्तावित बिल का विरोध किया और इसे पार्लियामेंट्री पैनल को भेजे जाने की अपील की। प्रियंका गांधी ने भी महात्मा गांधी का नाम हटाने पर गंभीर आपत्ति जताई।

 

थरूर ने राज्यों पर वित्तीय भार बढ़ाकर 40 प्रतिशत किए जाने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि न यह सरकार का सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना रवैया है बल्कि इसकी वजह से पूरा प्रोग्राम ही बेमानी साबित हो सकता है। इसकी वजह से कुछ राज्यों के लिए इसे लागू कर पाना काफी मुश्किल हो जाएगा।

 

यह भी पढ़ें: ऐतराज से नाम बदलने की सुगबुगाहट तक, 1 दशक में मनरेगा ने क्या-क्या देखा?

राज्यों के लिए होगी दिक्कत

अपने तर्क को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, 'इसकी वजह से मजदूरी देने देरी होगी जिससे काम के दिनों में कमी आएगी। इसकी वजह से इस कार्यक्रम की मूल आत्मा ही खत्म हो जाएगी।'

 

बिल के मुताबिक इसके तहत एक वित्तीय वर्ष में हर परिवार के एक युवा सदस्य को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी।


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