संजय सिंह, पटना। बिहार की राजनीति इन दिनों एक अहम मोड़ पर खड़ी है, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भविष्य को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। उनके राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने की खबर ने सियासी हलचल को और तेज कर दिया है। इसी के साथ सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि वे मुख्यमंत्री पद से कब इस्तीफा देंगे और राज्य में नई सरकार का गठन आखिर कब होगा?
कल शपथ लेंगे नीतीश कुमार
नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ले सकते हैं। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि शपथ ग्रहण के तुरंत बाद वे मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ेंगे। बताया जा रहा है कि वे कुछ दिनों तक दोनों जिम्मेदारियां संभालते हुए राजनीतिक संक्रमण को संतुलित तरीके से पूरा करेंगे।
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इस बीच, जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि बिहार में अगली सरकार का नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी करेगी। हालांकि मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। सामाजिक और जातीय समीकरणों को देखते हुए उनके नाम पर गंभीर मंथन जारी है।
13 अप्रैल को होगी कैबिनेट की अंतिम बैठक
13 अप्रैल को मौजूदा कैबिनेट की अंतिम बैठक आयोजित की जा सकती है, जिसमें कई फैसले होने की उम्मीद है। इसके ठीक अगले दिन यानी 14 अप्रैल को नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद 15 अप्रैल को नई सरकार के शपथ ग्रहण का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसमें नए मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्य पद की शपथ लेंगे।
बदलाव के कारण कार्यकर्ताओं में असंतोष
गौरतलब है कि यह पूरा घटनाक्रम काफी रणनीतिक तरीके से तय किया गया है। होली के दौरान जब नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर सामने आई थी, तब पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष देखने को मिला था। पटना स्थित जेडीयू कार्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन ने पार्टी नेतृत्व को यह संकेत दे दिया था कि बदलाव को चरणबद्ध और संतुलित तरीके से लागू करना जरूरी है।
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यही कारण है कि राज्यसभा की शपथ और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बीच कुछ दिनों का अंतर रखा गया है, ताकि प्रशासनिक स्थिरता बनी रहे और राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट रूप से दिया जा सके। पार्टी और गठबंधन यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद शासन की निरंतरता प्रभावित न हो।
बिहार की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे नीतीश
दिल्ली जाने के बाद भी नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे। उनकी नीतियों, योजनाओं और नीतीश मॉडल को नई सरकार में भी जारी रखने की बात कही जा रही है। नई सरकार के गठन में सामाजिक संतुलन और राजनीतिक समीकरणों को साधने में भी उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है। बिहार की सियासत में यह बदलाव केवल नेतृत्व परिवर्तन भर नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक पुनर्संतुलन की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले कुछ दिन राज्य की राजनीति की दिशा और दशा तय करने में निर्णायक साबित होंगे।
