पश्चिम बंगाल में मिली करारी हार के बाद अब ममता बनर्जी कांग्रेस और वाम दलों से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ जंग में मदद मांग रही हैं। उन्होंने हार के बाद कहा कि वह राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन को मजबूत करेंगी लेकिन अब कांग्रेस और वाम दल ही उनसे किनारा करते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस के नेता उन्हें याद दिला रहे हैं कि किस तरह से उन्होंने 2024 में कांग्रेस के खिलाफ काम किया था और उससे पहले अपने डेढ़ दशक के राज में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को खत्म किया। इस बीच ममता बनर्जी के कट्टर विरोधी और कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी के साथ गठबंधन को लेकर एक खास शर्त रख दी है। 

 

अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी के हाल के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन पर निशाना साधा और कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए उनके सामने एक खास शर्त रख दी। अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पहले ममता बनर्जी उनकी शर्त मानें और उसके बाद कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए दरखास्त दें। 

 

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क्या है शर्त?

अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने शर्त रखते हुए कहा, 'अब ममता बनर्जी सबको बुलाने की कोशिश कर रही हैं क्योंकि उनकी ताकत अब नहीं है कि वह अपने दम पर अब कुछ करें। उन्होंने फिर भी कांग्रेस का नाम नहीं लिया। अगर बचना है तो राहुल गांधी को इंडिया गठबंधन का नेता मानें और उसके बाद गठबंधन के लिए दरखास्त करें। उसके बाद सोचा जाएगा।'

लेफ्ट ने क्या कहा?

ममता बनर्जी की एकजुटता की अपील को लेफ्ट यानी वाम दलों ने भी खारिज कर दिया है। लेफ्ट के नेता माहम्मद सलीम ने कहा, 'हम किसी भी अपराधी, वसूली करने वाले, भ्रष्ट और सांप्रदायिक व्यक्ति को स्वीकार नहीं करेंगे। हम जनता और गरीबों के साथ खड़े रहेंगे।' इसके अलावा CPI के राज्य सचिव, स्वपन बनर्जी ने कहा, 'ममता के साथ जाने का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि उनके शासन में लोकतंत्र खतरे में था।'

 

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गठबंधन क्यों मुश्किल?

ममता बनर्जी 2011 में पहली बार कांग्रेस के साथ गठबंधन से ही मुख्यमंत्री बनी थी लेकिन 2016 तक उन्होंने कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं को तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल कर लिया और लेफ्ट और कांग्रेस साथ आ गए। इसके बाद कांग्रेस लगातार पश्चिम बंगाल में हाशिए पर है। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी विपक्षी गठबंधन में शामिल जरूर हुई लेकिन उन्होंने राहुल गांधी को नेता नहीं माना। उन्होंने कांग्रेस पार्टी और लेफ्ट के दलों को राज्य में सीटें नहीं दी। नतीजा यह रहा की ममता बनर्जी के खिलाफ कांग्रेस-लेफ्ट ने उम्मीदवार उतार दिए।

 

ममता बनर्जी की पार्टी विपक्षी गठबंधन का हिस्सा है लेकिन संसद की चारदीवारी के अंदर तक। ममता बनर्जी की पार्टी के नेता उन्हें अगले पीएम के रूप में पेश कर रहे थे। ऐसे में अब कांग्रेस उन्हें किस तरह गठबंधन में जगह देती है इस पर सभी की नजरें हैं। कांग्रेस पार्टी के कई नेता पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के कट्टर विरोधी हैं। अगर दोनों पार्टियां साथ आ जाती हैं तो ऐसे नेता छिटक कर बीजेपी के पाले में जा सकते हैं।