मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को अपनी 'समृद्धि यात्रा' के तीसरे चरण के लिए बेगूसराय के दौरे पर थे। उनके हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए जिला प्रशासन ने विशेष हेलीपैड बनाया था और चारों तरफ बांस-बल्लों की बैरिकेडिंग करके इलाके को पूरी तरह सुरक्षित घोषित कर दिया था। भारी संख्या में पुलिस बल और जिले के आला अधिकारी वहां मुख्यमंत्री का इंतजार कर रहे थे। तभी अचानक सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए एक आवारा सांड अंदर दाखिल हो गया। सांड को देखते ही वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों के बीच भगदड़ मच गई।
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जब वहां मौजूद पुलिस के जवानों ने सांड को डंडा दिखाकर बाहर खदेड़ने की कोशिश की, तो सांड और ज्यादा हिंसक हो गया। सांड ने जवानों पर हमला करने के लिए उन्हें दौड़ना शुरू कर दिया। स्थिति ऐसी बन गई कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा के लिए तैनात पुलिसकर्मी खुद की जान बचाने के लिए तेजी से भागने लगे। कुछ जवान बैरिकेडिंग के ऊपर से कूदे तो कुछ सुरक्षित जगहों की तलाश में इधर-उधर छिपे। काफी देर तक सांड उस प्रतिबंधित इलाके में बेखौफ घूमता रहा और सुरक्षा व्यवस्था का मजाक उड़ाता नजर आया।
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सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
राहत की बात यह रही कि जिस वक्त सांड ने वहां तांडव मचाया, उस वक्त मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर हवा में ही था और लैंड नहीं किया था। अगर मुख्यमंत्री के उतरते समय यह घटना होती तो स्थिति बहुत गंभीर हो सकती थी। मौके पर एनडीए के कई नेता और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे, जो इस नजारे को देखकर काफी हैरान रह गए। बहुत मशक्कत के बाद सांड वहां से बाहर निकला। तब जाकर सुरक्षाकर्मियों ने चैन की सांस ली। इस घटना ने वीवीआईपी सुरक्षा में हुई इस गंभीर लापरवाही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए है।