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बंगाल में किसकी बनेगी सरकार?

तस्वीर: इंडियन एक्सप्रेस/योगेश पाटिल

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नंदीग्राम पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य का केंद्र बना हुआ है। कभी भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन का गढ़ रहा यह इलाका अब एक ऐसी हाई-स्टेक्स रणभूमि में बदल गया है, जहाँ व्यक्तिगत निष्ठाएँ और पार्टी की प्रतिष्ठा आपस में टकरा रही हैं। इस ग्राउंड रिपोर्ट में, हम विस्तार से बता रहे हैं कि "नंदीग्राम मॉडल" अपनी अब तक की सबसे बड़ी परीक्षा से क्यों गुज़र रहा है।

 

कहानी अब दिग्गजों की लड़ाई से हटकर विश्वासघात की लड़ाई में बदल गई है। इस क्षेत्र में BJP का चेहरा सुवेंदु अधिकारी अब सिर्फ़ TMC की चुनावी मशीनरी से ही नहीं लड़ रहे हैं; बल्कि वे अपनी ही परछाई से लड़ रहे हैं।

 

चुनौती देने वाला: अधिकारी का एक पूर्व करीबी सहयोगी अब TMC की कमान संभाले हुए है, और उन्हीं ज़मीनी नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है जिन्हें अधिकारी ने खुद खड़ा किया था।  निगरानी करने वाला: अभिषेक बनर्जी ने नंदीग्राम को अपना निजी प्रोजेक्ट बना लिया है; बताया जा रहा है कि वे हर घंटे बूथ-स्तर के डेटा पर नज़र रख रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि TMC पिछली रणनीतिक गलतियों को न दोहराए। बढ़ता ज़ोर: पास के चांदीपुर में अमित शाह की हालिया रैली ने BJP की "पूरी ताक़त झोंक देने" वाली रणनीति का संकेत दिया, जिसकी पुष्टि उनके इस ऐलान से हुई कि "अब कमल खिलने का समय आ गया है।"

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