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NCERT के न्यायपालिका में भ्रष्टाचार चैप्टर पर सख्त SC

तस्वीर: इंडियन एक्सप्रेस/योगेश पाटिल

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सुप्रीम कोर्ट NCERT की किताब के उस चैप्टर को लेकर और भी ज़्यादा सख़्त हो गया है, जिसमें न्यायपालिका के अंदर भ्रष्टाचार की बात की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अब आदेश दिया है कि इस चैप्टर को तीसरी बार, विशेषज्ञों की देखरेख में, एक नए तरीके से फिर से लिखा जाए। इसके साथ ही, उसने इस चैप्टर को लिखने वाले तीन प्रोफ़ेसरों को अयोग्य घोषित कर दिया है और निर्देश दिया है कि सरकार उन्हें कोई भी सरकारी काम न सौंपे। उन्हें किसी भी सिलेबस को तैयार करने में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

उन तीनों प्रोफ़ेसरों के नाम हैं: मिशेल डैनिनो, जो मूल रूप से फ़्रांसीसी हैं। बाकी दो हैं सुवर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार। इन तीनों में से, आलोक प्रसन्ना कुमार की पृष्ठभूमि क़ानून से जुड़ी है। ये तीनों ही उस 'पाठ्यपुस्तक विकास टीम' का हिस्सा थे, जिसने NCERT की किताब तैयार की थी। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, उनके द्वारा तैयार किए गए इस चैप्टर से इतने नाराज़ हुए कि उन्होंने इसे एक 'सोची-समझी साज़िश' करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पता है कि इससे कैसे निपटना है, और वे खुद इस मामले को संभालेंगे।

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