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Ex वाइफ को मारने नमक में मिलाया जहर

तस्वीर: इंडियन एक्सप्रेस/योगेश पाटिल

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शशिरेखा की हालत बेहद नाज़ुक थी। पिछले कई दिनों से उसे लगातार उल्टी और दस्त हो रहे थे। उसके हाथ-पैर सूज गए थे, और ऐसा लग रहा था मानो उसके शरीर ने काम करना ही बंद कर दिया हो। उसके माता-पिता उसे कई डॉक्टरों के पास ले गए थे, लेकिन कोई भी यह समझ नहीं पा रहा था कि उसे आखिर बीमारी क्या है। आखिरकार, उसे एक न्यूरोलॉजिस्ट यानी नसों और तंत्रिका तंत्र के विशेषज्ञ के पास रेफर किया गया।
गुंटूर के अमरावती अस्पताल में, डॉ. वेमुरी राम तारकनाथ ने शशिरेखा की जाँच की। जब उन्होंने उसका हाथ पकड़ा, तो एक अजीब सी बात पर उनका ध्यान गया। उसके नाखूनों पर सफ़ेद रंग की लकीरें थीं। कोई आम डॉक्टर शायद इन्हें नज़रअंदाज़ कर देता, लेकिन डॉ. तारकनाथ जानते थे कि ये कोई साधारण निशान नहीं हैं। मेडिकल साइंस में इन्हें 'मीस लाइन्स' के नाम से जाना जाता है। ये लकीरें तब दिखाई देती हैं, जब आर्सेनिक जैसी कोई ज़हरीली धातु शरीर में प्रवेश कर जाती है।


मेडिकल इतिहास में आर्सेनिक को "ज़हरों का राजा" कहा जाता है, क्योंकि इसका न कोई स्वाद होता है, न कोई गंध और न ही कोई रंग। अगर इसे खाने में मिला दिया जाए, तो कोई भी इसका पता नहीं लगा सकता।
डॉ. तारकनाथ ने तुरंत कुछ जाँचें करवाने का आदेश दिया। जाँच के नतीजे देखकर हर कोई हैरान रह गया। शशिरेखा के खून और पेशाब में आर्सेनिक का स्तर सामान्य से 20 गुना ज़्यादा था।
लेकिन ज़रा रुकिए —शशिरेखा अकेली ऐसी नहीं थी जो बीमार पड़ी हो। इस कहानी की शुरुआत यहाँ से नहीं होती। असल में, इसकी शुरुआत होती है एक शादी से, एक पुरानी दुश्मनी से, और लंदन में हज़ारों किलोमीटर दूर बैठे एक ऐसे आदमी से, जिसने एक पूरे परिवार को तबाह करने का फ़ैसला कर लिया था।

 

 

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