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30 लाख साल पुराने बेबी प्लैनेट की हुई खोज, विज्ञान को देगी नई दिशा

यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलाइना अब तक के सबसे युवा ग्रह की खोज की है। जानिए क्यों है यह वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण।

Youngest planet discovery, IRAS 04125+2902 b planet

वैज्ञानिकों ने की बेबी प्लैनेट की खोज। (सांकेतिक चित्र, Pic Crediy- Freepik)

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ब्रह्मांड में कई ऐसी चीजें हैं, जिनका ज्ञान ज्ञान इंसान को अभी तक नहीं है। इसपर कई वैज्ञानिक और संस्थाएं शोध में जुटी हुई हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलाइना की मैडीसन जी. बार्बर के नेतृत्व में खगोलविदों ने हाल ही में अब तक के सबसे युवा ग्रह की खोज की है, जिसका नाम IRAS 04125+2902 b है। यह ग्रह केवल तीन मिलियन (30 लाख) वर्ष पुराना है और पृथ्वी से लगभग 430 प्रकाश वर्ष दूर टॉरस मॉलिक्यूलर क्लाउड नामक एक तारे के निर्माण क्षेत्र में स्थित है। 

 

यह खोज वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी सफलता है, जिससे उन्हें इस शोध में सफलता मिलेगी कि ग्रह कैसे बनते और विकसित होते हैं? इसे नेचर पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

युवा ग्रह को ढूंढना क्यों खास है?

बहुत से युवा ग्रह अक्सर अपने तारे के चारों ओर घूमने वाले धूल और मलबे में छिपे रहते हैं, लेकिन IRAS 04125+2902 b को देखना संभव हुआ क्योंकि इसकी बाहरी मलबे की डिस्क अजीब तरीके से टेढ़े आकार है। इस विकृति के कारण, NASA के TESS (ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट) ने इस ग्रह को तब देखा जब यह अपने तारे के सामने से गुजरा, जिससे तारे की रोशनी हल्की सी कम हो गई। इस डिस्क के टेढ़े होने की वजह अभी तक साफ नहीं है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी वजह पास के किसी अन्य तारे का गुरुत्वाकर्षण, कोई अनदेखा भारी पिंड, या तारे के पास गिरता हुआ गैस और मलबा हो सकता है। यह हमें हमें ग्रह प्रणालियों के शुरुआती चरणों की गहरी जानकारी दे सकती है।

ग्रह के बारे में क्या पता चला?

यह ग्रह जुपिटर के मास का एक-तिहाई है, लेकिन आकार में लगभग इतना ही बड़ा है। इसका मतलब है कि यह ग्रह कम घनत्व वाला है और इसके वायुमंडल की परत फूली हुई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ग्रह आगे चलकर मिनी-नेप्च्यून या सुपर-अर्थ जैसा बन सकता है, जो हमारी आकाशगंगा में आमतौर पर पाए जाने वाले ग्रहों के प्रकार हैं। IRAS 04125+2902 b जैसी खोजें हमें यह समझने का अनोखा मौका देती हैं कि ग्रह कैसे बनते और उनका विकास कैसा होता है। यह हमारे सौर मंडल के शुरुआती अवस्था को समझने में भी मदद कर सकती है। यह ग्रह प्रणाली अध्ययन का एक महत्वपूर्ण मॉडल बन सकती है, खासकर उन युवा ग्रहों के लिए जो एक तारे के चारों ओर धूल से घिरे होते हैं।


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