राजस्थान की शिव विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी अक्सर चर्चा में रहते हैं। इस बार वह एक आंदोलन की वजह से चर्चा में हैं। कई दिनों से गिरल लिग्नाइट माइंस क्षेत्र में मजदूरों के हक के लिए धरने पर बैठे रवींद्र सिंह भाटी ने मंगलवार को बाड़मेर कलेक्ट्रेट के लिए कूच किया। भारी भरकम काफिला लेकर निकले रवींद्र सिंह भाटी को जब पुलिस और प्रशासन की टीम ने रोका तो वह नाराज हो गए और गाड़ी से उतरकर प्रदर्शन कर लगे। अचानक उन्होंने एक बोतल निकाली और खुद पर तेल छिड़क लिया। अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वीडियो में देखा जा सकता है कि पैदल चल रहे रवींद्र भाटी अपने एक साथी से बात कर रहे होते हैं। देखते ही देखते वह एक बोतल निकालते हैं जो शायद पेट्रोल से भरी हुई थी। वह इस पेट्रोल को अपने ऊपर छिड़कते हैं तो वहां खलबली मच जाती है। कलेक्ट्रेट के सामने ही खुद पर तेल छिड़क रहे रवींद्र भाटी के एक साथी ने उनके हाथ से तेल की बोतल छीन ली और बाकी के साथी उन्हें रोकने लगे। उनके साथ मौजूद अन्य लोगों ने उनकी आंख में गए पेट्रोल को साफ करने के लिए कपड़े से पोछा और देखते ही देखते वहां शोर मच गया। गनीमत रही कि कोई अनहोनी नहीं हुई।
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क्या है गिरल लिग्नाइट माइंस का विवाद?
बाड़मेर जिले में चलने वाली तमाम खदानों में से एक खदान गिरल माइन्स भी है। यहां लिग्नाइट का खनन होता है। स्थानीय श्रमिक मांग कर रहे हैं कि खदान में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाए, नौकरी की सुरक्षा हो और श्रम अधिकारों का पालन किया जाए। इसके अलावा, खदान में होने वाले श्रमिकों के शोषण और तमाम गड़बड़ियों को लेकर कामगारों में आक्रोश है। इसी को लेकर लगभग 2 महीने से धरना चल रहा है।
कर्मचारियों की मांग है कि ड्यूटी सिर्फ 8 घंटे की हो, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिले, कुशल श्रेणी के लोगों को उसी के हिसाब से वेतन मिले, धरने पर बैठे श्रमिकों का वेतन जारी हो, बोनस मिले और कैंटीन की सुविधा शुरू की जाए। श्रमिकों का कहना है कि जब तक कंपनी लिखित रूप में इन मांगों को नहीं मानती तब तक धरना जारी रहेगा।
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रवींद्र भाटी भी कई दिनों से इस धरने का हिस्सा बन गए हैं। कलेक्ट्रेट की ओर कूच करने से पहले रवींद्र भाटी ने कहा था, 'एक निर्वाचित प्रतिनिधि 15 दिन से श्रमिकों के अधिकार के लिए धरने पर बैठा है लेकिन सरकार की ओऱ से एसडीएम स्तर का अधिकारी तक बातचीत के लिए नहीं आया। आखिर सरकार किस बात का इंतजार कर रही है? अगर श्रमिकों को मरने के लिए मजबूर किया जाएगा तो उससे पहले वह अपनी जान दे देंगे ताकि सत्ता में बैठे लोगों तक मजदूरों की पीड़ा पहुंच सके।'