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कंधे पर हाथ, मंच पर मुस्कान, गांधी मैदान में फिर दिखी मोदी-नीतीश की केमिस्ट्री

गांधी मैदान में प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार की मुलाकात ने पुरानी दोस्ती की याद दिला दी। दोनों नेताओं की इस नजदीकी और नीतीश के बेटे को मिले आशीर्वाद ने बिहार की राजनीति में बड़ा मैसेज दिया है।

PM Narendra Modi And Nitish Kumar

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार, Photo Credit: PTI

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संजय सिंह, पटना: बिहार के पटना स्थित गांधी मैदान में सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के बीच जबरदस्त तालमेल देखने को मिला। शपथ ग्रहण का काम पूरा होने के बाद जब मंच पर सभी नेता आपस में मिल रहे थे तभी प्रधानमंत्री मोदी की नजर नीतीश कुमार पर पड़ी। उन्होंने हाथ से इशारा करके नीतीश कुमार को अपने पास बुलाया। जैसे ही नीतीश कुमार पास आए, प्रधानमंत्री ने बड़े प्यार से उनका हाथ थाम लिया और नीतीश कुमार ने भी प्रधानमंत्री के कंधे पर हाथ रखकर उसे हल्के से थपथपाया।

 

मंच पर एक बहुत ही दिलचस्प नजारा तब दिखा जब प्रधानमंत्री मोदी ने भीड़ के बीच मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार को ढूंढना शुरू किया। निशांत कुमार जैसे ही सामने आए उन्होंने झुककर प्रधानमंत्री के पैर छुए। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने बड़े स्नेह के साथ उन्हें अपना आशीर्वाद दिया। मंच पर मौजूद बड़े नेताओं और नीचे बैठी जनता के बीच यह पल काफी चर्चा का विषय बना रहा।

 

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NDA की एकजुटता का संकेत

राजनीति को समझने वाले लोग इस मुलाकात को सिर्फ एक औपचारिकता नहीं मान रहे हैं। बिहार की राजनीति में मोदी और नीतीश की जोड़ी हमेशा से बहुत ताकतवर रही है। बीच में भले ही दोनों के बीच कुछ समय के लिए दूरियां आ गई थीं लेकिन गांधी मैदान में जिस तरह से दोनों बड़े नेता गर्मजोशी से मिले, उसने यह साफ मैसेज दे दिया है कि NDA का गठबंधन अब पूरी तरह मजबूत और एकजुट है। नए मंत्रियों के शपथ लेने के साथ ही दोनों नेताओं का यह व्यवहार आने वाले समय की राजनीति के लिए बहुत जरूरी माना जा रहा है।

 

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पुराने दौर की चमक

बिहार की राजनीति में गुरुवार को गांधी मैदान के मंच पर दिखी यह तस्वीर उन पुराने दिनों की याद दिलाती है जब मोदी और नीतीश को विकास और एक स्थिर सरकार का प्रतीक माना जाता था। राजनीति दूरियों और बदलते वक्त के बावजूद दोनों नेताओं के बीच वही पुरानी सहजता फिर से नजर आई। इस दृश्य ने यह साफ कर दिया कि बिहार की राजनीति में पुराने यादों की वापसी हो रही है और गठबंधन के रिश्ते अब फिर से पटरी पर लौट आए हैं।

 

 


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