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बच्चों की मार्कशीट में हुई गलती, ठीक कराने के लिए टीचर देंगे लाखों रुपये

मोहाली के एक स्कूल में स्टाफ की गलती से 113 छात्रों के रिकॉर्ड में माता-पिता के नाम बदल गए हैं। अब अपनी गलती सुधारने के लिए टीचर्स खुद की जेब से लाखों रुपये की फीस भरेंगे।

Students Image, Photo Credit: ANI

छात्राएं, Photo Credit: ANI

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पंजाब के मोहाली जिले से एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां कलेवाल के एडुस्टार आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 10वीं कक्षा के 113 छात्रों के रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरते समय स्टाफ ने पिता के नाम की जगह माता का नाम और माता के नाम की जगह पिता का नाम लिख दिया। सीबीएसई ने इस गलती को सुधारने के लिए हर बच्चे के हिसाब से 2,500 रुपये की फीस मांगी है, जो कुल 2,82,500 रुपये बनती है। अब स्कूल के टीचर्स ने फैसला किया है कि वे अपनी जेब से यह पैसा भरेंगे ताकि बच्चों का भविष्य खराब न हो।

 

मोहाली जिले के इस स्कूल में फॉर्म भरते समय हुई इस चूक के कारण 113 छात्र-छात्राओं के रिकॉर्ड खराब हो गए हैं। अगर समय पर इसे ठीक नहीं किया गया, तो बच्चों की मार्कशीट पर माता-पिता के नाम गलत छप कर आएंगे। बोर्ड की ओर से सुधार के लिए मांगी गई करीब 2.82 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि अब स्कूल का स्टाफ मिलकर देगा। टीचर्स का कहना है कि यह गलती उनसे हुई है, इसलिए इसका हर्जाना भी वही भरेंगे ताकि 10 अप्रैल की आखिरी तारीख से पहले सीबीएसई का काम पूरा हो जाए।

 

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पेरेंट्स ने किया विरोध

इस मामले में शुरुआत में स्कूल ने माता-पिता को मैसेज भेजकर 2,500 रुपये जमा करने को कहा था, जिसका बुधवार को पेरेंट्स ने स्कूल पहुंचकर भारी विरोध किया। इसके बाद मोहाली की जिला शिक्षा अधिकारी गिन्नी दुग्गल ने साफ कर दिया कि किसी भी माता-पिता से एक रुपया भी नहीं लिया जाएगा। स्कूल की प्रिंसिपल सुमन लता ने बताया कि स्टाफ ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है। अब स्टाफ के सदस्य मिलकर अपनी जेब से 2.82 लाख रुपये की रकम भरेंगे ताकि 10 अप्रैल की समय सीमा तक सीबीएसई को फीस दी जा सके और बच्चों का साल खराब न हो।

 

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10 अप्रैल तक कि आखिरी तारीख

पंजाब शिक्षा विभाग और सीबीएसई के नियमों के मुताबिक रिकॉर्ड में सुधार के लिए 10 अप्रैल तक का ही समय है। अगर इस दौरान फीस जमा नहीं होती, तो छात्रों की फाइनल मार्कशीट पर गलत जानकारी दर्ज हो जाती। स्कूल प्रिंसिपल के मुताबिक, शुक्रवार तक यह पैसा बोर्ड को भेज दिया जाएगा। फिलहाल प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के डेटा में यह गड़बड़ी हुई कैसे।


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