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बिना वकील कोर्ट में केस जीत गया स्टूडेंट, सुप्रीम कोर्ट के जज ने भी कर दी तारीफ

जबलपुर के 19 वर्षीय छात्र ने वकील के बिना खुद सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ा और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में गरीब छात्रों के लिए 10% कोटा लागू करवाकर अपनी एमबीबीएस की सीट पक्की की।

Atharav Chaturvedi, Photo Credit: Social Media

अथर्व चतुर्वेदी, Photo Credit: Social Media

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जबलपुर के 19 वर्षीय छात्र अथर्व चतुर्वेदी ने कानून कि जानकारी और हिम्मत के दम पर देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ी जीत हासिल की है। नीट की परीक्षा पास करने का बाद भी मध्य प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का कोटा लागू न होने का कारण उन्हें एडमिशन नहीं मिल पा रहा था। आर्थिक तंगी और बड़े वकीलों की भारी-भरकम फीस चकाने में असमर्थ होने के कारण, अथर्व ने खुद अपना केस लड़ने का फैसला किया।

 

अथर्व के पिता खुद एक वकील हैं, लेकिन दिल्ली में केस लड़ने का खर्च उठाना उनके परिवार के लिए मुश्किल था। ऐसे में अथर्व ने खुद कानून की बारीकियों को समझा और सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल दी। जब कोर्ट की कार्यवाही खत्म होने वाली थी, तब उन्होंने बिना किसी भावुकता के सिर्फ तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपनी बात रखी।

 

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संविधान और नियमों पर की बात

अथर्व ने कोर्ट में तर्क दिया कि संविधान के 103वें संशोधन और अनुच्छेद 15(6) के तहत, निजी और गैर-अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में 10 फीसदी आर्थिक तौर पर पिछड़े सामान्य वर्ग के लोगों को EWS आरक्षण देना अनिवार्य है। उन्होंने साफ किया कि मध्य प्रदेश के प्राइवेट मेडिकल कॉलेज इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं, जो कि उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। उनकी दलीलें इतनी सटीक थीं कि जजों ने उनकी कानूनी समझ की सराहना की।

 

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला

जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने अथर्व की दलीलों को सही पाया और उनके पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत के इस आदेश के बाद अब अथर्व के लिए EWS कोटे के तहत एमबीबीएस में दाखिले का रास्ता साफ हो गया है। यह मामला उन सभी छात्रों के लिए एक उदाहरण बन गया है जो संसाधनों की कमी के बावजूद अपने हक के लिए लड़ना चाहते हैं। 


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