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तेलंगाना में सफाई कर्मचारियों की सैलरी 2 लाख, वेतन देने में खर्च हो जा रहे पैसे

तेलंगाना में पुराने कर्मचारियों की सैलरी लाखों में पहुंचने से सरकार का हर महीने का खर्च 6,000 करोड़ रुपये हो गया है। पिछले 10 सालों में सैलरी और पेंशन का बजट चार गुना बढ़ चुका है।

K Ramakrishna Rao, Photo Credit: PTI

के रामकृष्ण राव, Photo Credit: PTI

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तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक चौका देने वाली रिपोर्ट सामने आई है। यहां नगर निगम में काम करने वाले कुछ वरिष्ठ सफाई कर्मचारियों  की हर महीने की सैलरी 2 लाख रुपये तक पहुंच गई है। इस चौंकाने वाले सच का खुलासा राज्य के वित्त विभाग के विशेष मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है। उन्होंने बताया कि यह सैलरी किसी बड़े अफसर या इंजीनियर की नहीं, बल्कि उन सफाई कर्मचारियों की है जो पिछले 30-35 सालों से विभाग में पक्के तौर पर काम कर रहे हैं।

 

विशेष मुख्य सचिव ने अपनी रिपोर्ट में समझाया कि इतनी भारी-भरकम सैलरी के पीछे समय-समय पर होने वाली 'सैलरी बढ़ोतरी' और सरकारी भत्ते हैं। तेलंगाना में पिछले 10 सालों में कर्मचारियों की तनख्वाह में कई बार बड़ा इजाफा किया गया है। खासकर पुराने कर्मचारियों की बेसिक सैलरी पर जब नया महंगाई भत्ता और 'फिटमेंट' जुड़ता है, तो उनकी कुल कमाई लाखों में पहुंच जाती है। इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बिजली विभाग के मुख्य इंजीनियरों की सैलरी तो अब 7 लाख रुपये महीना तक पहुंच गई है।

 

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सरकारी खजाने पर बढ़ता बोझ

सैलरी में हुई इस बेतहाशा बढ़ोतरी ने राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी है। साल 2014 में जब तेलंगाना नया राज्य बना था, तब सरकार हर महीने सैलरी और पेंशन पर करीब 1,500 करोड़ रुपये खर्च करती थी। लेकिन के. रामकृष्ण राव की रिपोर्ट के अनुसार, आज यह खर्च चार गुना बढ़कर हर महीने 6,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। सचिव ने चेतावनी दी है कि अगर इसी तरह कमाई का बड़ा हिस्सा सिर्फ सैलरी देने में जाता रहा, तो राज्य के दूसरे विकास कार्यों के लिए बजट की कमी हो सकती है।

 

इतनी मोटी सैलरी और सुविधाओं की खबर ने युवाओं के बीच सरकारी नौकरी का जबरदस्त क्रेज पैदा कर दिया है। आज हर कोई चाहता है कि उसे बस एक बार सरकारी नौकरी मिल जाए। इस आकर्षण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में 'ग्रुप-1' की सिर्फ 563 नौकरियों के लिए करीब 4.5 लाख युवाओं ने आवेदन किया है।

 

इसका मतलब है कि एक सीट के लिए 800 लोग आपस में मुकाबला कर रहे हैं। युवा सालों तक कोचिंग में पढ़ाई करते हैं ताकि उन्हें भी ऐसी सुरक्षित और मोटी कमाई वाली नौकरी मिल सके।

 

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पुराने और नए कर्मचारियों के बीच का अंतर

रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि यह लाखों वाली सैलरी हर किसी को नहीं मिल रही। हैदराबाद नगर निगम में केवल 2% कर्मचारी ही 'पक्के' हैं जो इस बड़े फायदे का लाभ उठा रहे हैं। इसके उलट, जो नए कर्मचारी भर्ती होते हैं, उनकी शुरुआती सैलरी 28,000 रुपये के आसपास ही होती है। यह बड़ी सैलरी सिर्फ उन अनुभवी लोगों को मिल रही है जिन्होंने विभाग में अपनी पूरी उम्र लगा दी है और सालों के सरकारी फायदों के कारण आज उनकी कमाई बड़े-बड़े अफसरों से भी ज्यादा हो गई है।

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