हिमाचल प्रदेश में टोल टैक्स बढ़ने वाला है जिसकी वजह से आने वाले दिनों में पहाड़ों पर सैर करना महंगा पड़ सकता है। बढ़े हुए टोल टैक्स को 1 अप्रैल से लागू किया जा सकता है। टोल टैक्स बढ़ाने के फैसले के बारे में हिमाचल प्रदेश सरकार ने कहा कि राज्य में बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और राजस्व को बढ़ाने के लिए टोल टैक्स में वृद्धि की जा रही है। यह फैसला टोल एक्ट 1975 के तहत लिया गया है। हालांकि राज्य सरकार ने केवल बाहरी वाहनों के लिए टैक्स बढ़ाया है। राज्य के वाहनों के लिए टोल टैक्स नहीं बढ़ाया गया है।
अगर इजाफे की बात करें तो कार, जीप, वैन और लाइट मोटर व्हीकल्स पर 100 रुपये टोल टैक्स का इजाफा हुआ है, जहां अभी इन वाहनों को 70 रुपये देने होते है, वहीं आने वाले दिनों में 170 रुपये एंट्री फीस देनी पड़ेगी। 12 से ज्यादा सीटों वाली पैसेंजर गाड़ियों पर टोल टैक्स 60 रुपये से बढ़ाकर 170 रुपये कर दिया गया है। अभी तक इस सेगमेंट की गाड़ियों के लिए टोल टैक्स 110 रुपये है। वहीं 32 सीटर मिनी बस का टोल 320 रुपये होगा जो अभी मात्र 180 रुपये है। बढ़ते टोल टैक्स का असर ट्रैवलर बसों पर भी पड़ेगा। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि ट्रैवलर बसें अपने यात्रियों का किराया भी जल्द बढ़ा सकती हैं।
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बड़े और कमर्शियल वाहनों पर टैक्स
कमर्शियल बसों की एंट्री फीस 600 रुपये कर दी गई है, जो अभी 320 रुपये है। कंस्ट्रक्शन मशीनरी वाहनों के लिए यह फीस 570 रुपये से बढ़कर 800 रुपये हो गई है। हालांकि, डबल
एक्सल बसों का टोल टैक्स नहीं बढ़ाया गया है और 1 अप्रैल के बाद भी यह 570 रुपये ही रहेगा।
नेशनल हाईवे के लिए भी हुए बदलाव
केंद्र सरकार ने नेशनल हाईवे पर भी टोल टैक्स के पेमेंट के लिए नियम बदल दिए हैं। इसमें 1 अप्रैल 2026 के बाद से देश भर के नेशनल हाईवे पर कैश पेमेंट पूरी तरह बंद हो जाएगा। जिनके पास फास्टैग नहीं होगा वे यूपीआई से पेमेंट कर पाएंगे लेकिन कैश का विकल्प उनके पास नहीं होगा।
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अभी के नियम को मुताबिक जिन लोगों के पास फास्टैग नहीं है वे अगर कैश से पेमेंट करते हैं तो उन्हें दोगुना पैसा देना पड़ता है।