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कोडीन सिरप मामले में बड़ी कार्रवाई, 30 करोड़ से ज्यादा संपत्ति फ्रीज

कोडीन सिरप मामले में वाराणसी में भोला जायसवाल सहित दो-तीन अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। करीब तीन करोड़ रुपये भी फ्रीज किए गए हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Social Media

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कोडीन कफ सिरप मामले में वाराणसी में एक और कार्रवाई हुई है। मामले में मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के पिता भोला जायसवाल और दो-तीन अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पिछले साल नवंबर में बड़ी मात्रा में कफ सिरप बरामद हुआ था।

 

कार्रवाई  करते हुए पुलिस ने भोला जायसवाल की 8 अचल संपत्ति को चिह्नित करके फ्रीज कर दिया है। यह कार्रवाई NDPS ऐक्ट के 68(f) के तहत की गई है। बताया जा रहा है कि इसकी कीमत 30 करोड़ से ज्यादा है।

खातों को भी किया फ्रीज

इसके अलावा इंडियन बैंक के तीन खातों में जमा 3 करोड़ से ज्यादा रुपयों को भी फ्रीज कर दिया गया है। इसके पहले पुलिस ने सोनभद्र जिले में कार्रवाई की थी। पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की नोटिसी की तामील सोनभद्र जेल में निरुद्ध भोला प्रसाद जायसवाल के द्वारा कराई गई।

 

वरुणा जोन की एडीसीपी नीतू कादयान ने कहा कि बाकी की संपत्तियों को भी चिह्नित किया जा रहा है और 68 (एफ) के तहत उनके लिए भी आदेश पारित किया जाएगा और 30 दिनों के भीतर अगर उनके लिए सक्षम कोर्ट में रिप्रेजेंटेशन नहीं किया जाएगा तो उनकी भी कुर्की कर दी जाएगी।

 

 

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24 बच्चों की हुई थी मौत

यह कार्रवाई मध्य प्रदेश में जहरीले कफ सीरप से 24 बच्चों की मौत के बाद तेज हुई, जिसके बाद यूपी में छापेमारी शुरू हुई। 18 अक्टूबर को सोनभद्र में छापे में स्नैक्स के कार्टनों में छिपाकर रखी गई कोडीन सीरप की 12,000 शीशियां बरामद हुईं। ट्रक ड्राइवरों ने बताया कि यह खेप जायसवाल की नकली कंपनी से गाजियाबाद के जरिए भेजी गई थीं।


जांच में पता चला कि नेटवर्क में कम से कम छह कागजी कंपनियां थीं, कई परिवहन और बिलिंग दस्तावेज जाली थे, और रांची की शैली ट्रेडर्स से फर्जी इनवॉयस जारी किए जाते थे। जायसवाल हिमाचल प्रदेश के एक कारखाने से सीरप लाकर गाजियाबाद में स्टोर करता, फिर आगरा, लखनऊ और वाराणसी के रास्ते पूर्वी इलाकों व विदेशों में बेचता था।

पहले मेडिकल सप्लायर था

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘कोविड से पहले जायसवाल छोटा-मोटा मेडिकल सप्लायर था। महामारी में प्रतिबंधित दवाओं की मांग बढ़ी तो उसने स्थानीय दबंग लोगों से गठजोड़ कर अपना कारोबार तेजी से बढ़ाया।’ गाजियाबाद, वाराणसी, जौनपुर समेत कई जिलों में शुभम और भोला के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हैं।

 

जायसवाल की वाराणसी की दुकान न्यू वृद्धि फार्मा से बड़ी खरीदारी को जायज ठहराया जाता था, जबकि शैली ट्रेडर्स के कागजात पूरी तरह फर्जी थे। नेटवर्क प्रयागराज, लखनऊ, कौशांबी, भदोही समेत 10 जिलों में फैला है।

 

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एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स और एसआईटी ने पुष्टि की कि शुभम और उसका साथी आसिफ नेपाल या दुबई भाग चुके हैं। अधिकारी कहते हैं कि जांच बढ़ने पर और बड़े अपराधियों की गिरफ्तारी होगी।


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