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कोनेरू हम्पी के हाथ से कैसे निकल गया वर्ल्ड रैपिड चेस चैंपियनशिप 2025 का खिताब?

कोनेरू हम्पी अपने वर्ल्ड रैपिड चेस चैंपियनशिप टाइटल को डिफेंड नहीं कर पाईं। FIDE के एक अजीबोगरीब नियम के कारण उनके हाथ से मौका निकल गया।

Koneru Humpy Chess

कोनेरू हम्पी, File Photo Credit: Michał Walusza via FIDE

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भारत की अनुभवी चेस खिलाड़ी कोनेरू हम्पी 5 महीने के भीतर दूसरी बार खिताब जीतने से चूक गई हैं। उन्हें इसी साल जुलाई में FIDE महिला वर्ल्ड कप फाइनल में हमवतन दिव्या देशमुख से हार का सामना करना पड़ा। अब वह कतर की राजधानी दोहा में आयोजित हुई FIDE वर्ल्ड रैपिड चैस चैंपियनशिप 2025 में एक भी गेम नहीं हारने के बावजूद खिताब नहीं जीत पाईं।

 

हम्पी ने पिछले साल इस चैंपियनशिप को अपने नाम किया था। उन्होंने टूर्नामेंट के 11वें राउंड में इंडोनेशिया की इरीन खरिस्मा सुखिंदर को हराकर दूसरी बार यह खिताब जीता था। इस बार वह FIDE के एक अजीबोगरीब नियम के चलते अपने टाइटल को डिफेंड नहीं कर पाईं। जानिए दिव्या के हाथ से खिताब जीतने का मौका कैसे निकल गया।

 

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जीत की स्थिति में थीं हम्पी

रविवार (28 दिसंबर) को 11वें और आखिरी राउंड में हम्पी के सामने हमवतन सविता श्री बी की चुनौती थी। इस गेम को जीतते ही हम्पी के पास चैंपियन बनने का मौका था। ऐसा इसलिए क्योंकि, उनके साथ संयुक्त रूप से टॉप पर मौजूद झू जिनर और एलेक्जेंड्रा अपने गेम ड्रॉ करा चुकी थीं। ऐसे में सविता पर जीत हम्पी को खिताब दिला देता लेकिन वह मजबूत स्थिति में होने के बावजूद नहीं जीत पाईं और उन्हें ड्रॉ से संतोष करना पड़ा।

 

सविता के साथ ड्रॉ खेलने से हम्पी को जिनर और एलेक्जेंड्रा के साथ टॉप स्पॉट शेयर करना पड़ा। 11 राउंड के बाद तीनों के पास एक समान 8.5 - 8.5 पॉइंट्स थे। अब विजेता का फैसला टाईब्रेक से होना था। हम्पी मन ही मन टाईब्रेकर की तैयारी कर रही थीं लेकिन अचानक इस भारतीय दिग्गज को पता चला कि उन्हें ब्रॉन्ज के साथ ही लौटना पड़ेगा, क्योंकि FIDE के नए नियम के अनुसार वह टाईब्रेक से बाहर हो गई थीं।

 

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टाई-ब्रेक में क्यों नहीं खेलीं हम्पी?

वर्ल्ड चेस की गवर्निंग बॉडी FIDE सितंबर 2025 में वर्ल्ड रैपिड ब्लिट्ज चैंपियनशिप के लिए नया नियम लेकर आया था। नए नियम के मुताबिक, टाई हुए नॉकआउट या प्लेऑफ गेम का नतीजा सडन डेथ तक से निकाला जाएगा। हालांकि ओपन और महिला वर्ग के लिए टाईब्रेक नियम अलग-अलग रखे गए। महिला वर्ग में पहले स्थान के लिए टाई होने वाली 2 ही खिलाड़ी टाईब्रेक में उतरेंगी, जबकि ओपन वर्ग में सभी को टाईब्रेक खेलने का मौका दिया जाएगा।

 

इस नियम के अनुसार, हम्पी, जिनर और एलेक्जेंड्रा में से दो ही खिलाड़ी टाईब्रेक में खेल सकती थीं। हम्पी भले ही जिनर और एलेक्जेंड्रा संग टॉप पर थीं लेकिन उनकी रैंकिंग तीसरी थी, जिसके कारण उन्हें टाईब्रेक में उतरने का मौका नहीं मिला। हम्पी अगर ओपन वर्ग में रहतीं तो उन्हें टाईब्रेकर खेलने को मिल सकता था।

2023 में भी टूटा था हम्पी का दिल

हम्पी वर्ल्ड रैपिड चेस चैंपियनशिप को दो बार जीत चुकी हैं। पिछले साल न्यूयॉर्क में चैंपियन बनने से पहले उन्होंने 2019 में मास्को में खिताब जीता था। वहीं 2023 में वह संयुक्त रूप से टॉप पर रहने के बाद टाईब्रेक में हार गई थीं।

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