• NEW DELHI
25 Dec 2025, (अपडेटेड 25 Dec 2025, 10:52 PM IST)
भारतीय खिलाड़ियों ने चेस में इस साल कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की। दिव्या देशमुख ने FIDE महिला वर्ल्ड कप का खिताब जीता। पढ़िए वर्ल्ड चैंपियन डी गुकेश का प्रदर्शन कैसा रहा?
डी गुकेश और दिव्या देशमुख, Photo Credit: Lennart Ootes/FIDE, PTI
साल 2025 के जुलाई में जॉर्जिया के बाटुमी में हुए FIDE महिला वर्ल्ड कप में दुनिया ने भारतीय चेस खिलाड़ियों दिव्या देशमुख और कोनेरू हम्पी को इतिहास बनाते देखा। इस टूर्नामेंट का फाइनल इन दोनों खिलाड़ियों के बीच खेला गया। इससे पहले FIDE महिला वर्ल्ड कप के इतिहास में कोई भारतीय खिलाड़ी फाइनल तक नहीं पहुंच पाई थी। उस समय 19 साल की रहीं दिव्या ने कोनेरू हम्पी को हराकर यह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने का गौरव हासिल किया।
दिव्या ने एक ओर जहां एक के बाद एक बड़ी उपलब्धियां हासिल की, वहीं वर्ल्ड चैंपियन डी गुकेश के लिए यह साल कुछ खास नहीं गुजरा। पिछले साल वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब जीतकर इतिहास रचने वाले गुकेश को इस साल लगातार हार का सामना करना पड़ा।
FIDE महिला वर्ल्ड कप के दौरान कोनेरू हम्पी और दिव्या देशमुख, Photo Credit: PTI
दिव्या के नाम रहा साल
दिव्या ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक खिताब और कैरियर की तीन उपलब्धियां अर्जित की। वह FIDE महिला वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और उन्होंने प्रतिष्ठित ग्रैंडमास्टर खिताब जीता। साथ ही दिव्या ने 2026 कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए भी क्वालिफाई किया। इस टूर्नामेंट के विजेता को मौजूदा महिला वर्ल्ड चैंपियन चीन की जू वेंजुन को चुनौती देने का मौका मिलेगा। दिव्या की जीत से देश में महिला चेस पर एक बार फिर लोगों की नजरें गईं, जो अब तक दो बार की वर्ल्ड रैपिड चैंपियन कोनेरू हम्पी और द्रोणवल्ली हरिका पर निर्भर थी। दोनों खिलाड़ी करीब दो दशक से भारत में महिला चेस की ध्वजवाहिका रही हैं।
दिव्या ने अपनी अप्रत्याशित जीत से सुर्खियां बंटोरीं। दूसरी ओर पिछले साल वर्ल्ड चैंपियन बने गुकेश को टाटा स्टील मास्टर्स में ब्लिट्ज टाइ-ब्रेकर में हमवतन आर प्रज्ञानानंदा ने हराकर खिताब जीता। वह फ्रीस्टाइल चेस ग्रैंडस्लैम से भी बाहर हो गए, FIDE ग्रैंड स्विस में नाकाम रहे और गोवा में FIDE वर्ल्ड कप के तीसरे दौर में हार गए। उन्होंने मई जून में नॉर्वे चेस में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को हराया और अक्टूबर में यूरोपीय क्लब कप में व्यक्तिगत और टीम खिताब जीते। इसके अलावा इस साल उनके नाम कोई उल्लेखनीय उपलब्धि नहीं रही।
गोवा में हाल ही में वर्ल्ड कप से भारत को कैंडिडेट्स टूर्नामेंट का कम से कम एक कोटा स्थान मिलने की उम्मीद थी लेकिन खिताब के प्रबल दावेदार प्रज्ञानानंदा, अर्जुन एरिगेसी, निहाल सरीन, पी हरिकृष्णा और विदित गुजराती अपने देश में खेलने का फायदा नहीं उठा सके। प्रज्ञानानंदा ने FIDE सर्किट 2025 जीतकर कैंडिडेट्स 2026 में जगह बनाई और रैंकिंग में टॉप पर रहकर इसमें पहुंचने वाले पहले भारतीय पुरूष खिलाड़ी बने। विश्वनाथन आनंद के 1988 में पहला भारतीय ग्रैंडमास्टर बनने के बाद से अब तक देश में 91 ग्रैंडमास्टर हो गए हैं और कई बनने की दहलीज पर हैं। इस साल एल आर श्रीहरि, दिव्या देशमुख, एस रोहित कृष्णा और राहुल वीएस समेत 6 खिलाड़ी इस कैटेगरी में शामिल हुए।