18 अप्रैल 2026 में हज यात्रा की शुरुआत हो चुकी है। भारत के अलग-अलग जगहों से कई लोग हज यात्रा के लिए सऊदी अरब जा रहे हैं। इस साल तीर्थ यात्रियों के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय ने इंतजाम किए हैं। इस बार हज यात्रा 20 दिनों की छोटी अवधि में भी पूरी की जा सकेगी, इससे ज्यादा लोग हज की यात्रा कर सकेंगे। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के मुताबिक इस साल करीब 75 हजार लोग हज की यात्रा करने वाले हैं।
हज यात्रा मुस्लिम धर्म में सबसे पवित्र यात्रा मानी जाती है। मुस्लिम धर्म की मान्यता है कि हर मुस्लिम व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार हज की यात्रा करनी चाहिए। हज की यात्रा में लोग सऊदी अरब के मक्का शहर में जाते हैं और मक्का के सबसे पवित्र धर्मस्थल काबा का दर्शन करते हैं।
धार्मिक मान्यता के मुताबिक हज की यात्रा करने से लोगों की हर दुआ कबूल होती है। इस वजह से सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के कई मुस्लिम लोग हज की यात्रा करने मक्का जाते हैं। अब सवाल उठता है कि हज यात्रा की परंपरा और मान्यता क्या है।
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हज यात्रा की मान्यता क्या है?
इस्लामिक मान्यता के मुताबिक हज की यात्रा इस्लाम धर्म के पांच स्तंभों में से एक है, जिसका पालन करना इस्लाम धर्म के लोगों के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। अब सवाल उठता है कि इस्लाम धर्म के पांच स्तंभ क्या हैं।
हज की यात्रा - इस्लाम धर्म में माना जाता है कि हज की यात्रा यानी तीर्थयात्रा कम से कम अपने जीवन में एक बार जरूर करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता के मुताबिक हज केवल एक यात्रा नहीं है बल्कि आत्मशुद्धता, सुकून और शांति का प्रतीक है।
रोजा -इस शब्द का अर्थ है उपवास रखना यानी कि इस्लाम धर्म को मानने वाले लोगों को रमजान के पवित्र महीने में रोजा रखना चाहिए।
जकात - इस्लाम धर्म में माना जाता है कि एक आर्थिक रूप से मजबूत व्यक्ति को दान देना चाहिए।
सलात - इस शब्द का अर्थ है प्रार्थना करना। हर व्यक्ति को दिन में पांच बार नमाज पढ़नी चाहिए।
शहादा - इस्लाम धर्म की मान्यता है कि हर व्यक्ति को पैगंबर मुहम्मद को अल्लाह का दूत मानना चाहिए।
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इस यात्रा की शुरुआत कैसे हुई थी?
इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक अल्लाह ने पैगंबर इब्राहिम से कहा था कि काबा के दर्शन के लिए लोगों को बुलाएं। उसके बाद पैगंबर ने लोगों को वहां हज यानी तीर्थयात्रा के लिए बुलाया था। तब से लेकर आज तक हज की परंपरा चलती आ रही है। हज की यात्रा करने वाले लोग मक्का के अलावा अन्य पवित्र धार्मिक स्थलों जैसे अराफात, मुजदलिफा और मीना भी जाते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती है।