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आंध्र के बाद तेलंगाना में भी भाई के सामने खड़ी हुई बहन, क्यों नाराज हैं कविता?

आंध्र प्रदेश के बाद अब तेलंगाना में भी सगे भाई बहन दो अलग-अलग राजनीतिक दलों में हैं और एक-दूसरे के धुर विरोधी बनकर सामने आ गए हैं।

k kavitha and kt rama rao

के कविता और के टी रामा राव, Photo Credit: PTI

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आंध्र प्रदेश और तेलंगाना अब अलग-अलग राज्य हैं लेकिन दोनों में एक जैसी राजनीति देखने को मिल रही हैं। दोनों ही राज्यों के दो बड़े राजनीतिक परिवारों की स्थिति अब एक जैसी हो चुकी है। कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे राजशेखर रेड्डी के बेटे जगन मोहन रेड्डी के सामने उनकी ही बहन वाई एस शर्मिला खड़ी हैं। तेलंगाना में भी अब ऐसा ही है और राज्य के पहले मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता ने भी अब अपनी नई पार्टी तेलंगाना राष्ट्र संदेश (TRS) बना ली है। दोनों ही परिवारों में मुख्य मुद्दा भाई बनाम बहन का है। आंध्र प्रदेश में जगन के सामने शर्मिला खड़ी हैं तो तेलंगाना में अब के टी रामा राव के सामने उनकी ही बहन के कविता खड़ी हो गई हैं।

 

दिल्ली आबकारी नीति मामले में जेल जा चुकी के कविता ने कई बार आरोप लगाए कि उनके पिता यानी केसीआर ऐसे लोगों से घिरे हैं जो भारत राष्ट्र समिति को खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने अपने चचेरे भाई हरीश राव और सगे भाई के टी रामा राव पर भी आरोप लगा चुकी हैं। अब वह अपने ही भाइयों के सामने खड़ी हैं और नई पार्टी बनाकर मैदान में उतर गई हैं। इससे पहले कविता ने अपने पिता केसीआर को कई बार चिट्ठी भी लिखी लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

 

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क्यों सस्पेंड हुई थीं कविता?

 

कविता के बागी रुख की वजह उनके ही भाई हैं। कविता ने पार्टी के सांसद संतोष कुमार, अपने चचेरे भाई हरीश राव और के टी रामा राव पर कई तरह के आरोप लगाए थे। कविता का कहना था कि उनके पिता यानी केसीआर को बदनाम करने की एक साजिश रची गई है और उनकी ही पार्टी के ये नेता सीएम रेवंत रेड्डी का साथ दे रहे हैं। कविता ने कालेश्वरम प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए यह तक कहा था कि केसीआर पर भ्रष्टाचार का दाग लगा क्योंकि उनके करीबियों ने उनके नाम का दुरुपयोग किया। 

 

उन्होंने केसीआर सरकार में मंत्री रहे हरीश राव और संतोष कुमार का नाम लेकर आरोप लगाए थे कि इन लोगों के चलते ही केसीआर की बदनामी हुई। 2025 में रक्षाबंधन के मौके पर भी केसीआर अपने भाई केटी रामा राव को राखी बांधने नहीं गईं। मई में उन्होंने अपने पिता केसीआर को एक चिट्ठी लिखी जो सार्वजनिक हो गई। उन्होंने आरोप लगाए थे कि केटीआर अपनी पार्टी का विलय बीजेपी में करना चाहते हैं। उन्होंने 2019 में निजामाबाद में खुद ही हार के लिए भी पार्टी के नेताओं को जिम्मेदार बताया था। यहीं से वह अपनी पार्टी के नेताओं के निशाने पर गई थीं।

 

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कविता के साथ क्या-क्या हुआ?

मई 2014- तेलंगाना की निजामाबाद लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं।

मई 2019- निजामाबाद से ही चुनाव लड़ीं लेकिन हार गईं।

अक्तूबर 2020- तेलंगाना विधान परिषद की सदस्य बनीं।

अप्रैल 2024- दिल्ली आबकारी नीति केस में घोटाले के आरोप में के कविता गिरफ्तार हुईं।

अगस्त 2024- जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आईं के कविता।
 सितंबर 2025- कविता को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से निलंबित कर दिया गया था।

सितंबर 2025- के कविता ने इसी से नाराज होकर बीआरएस और विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

अप्रैल 2026- अपनी नई पार्टी तेलंगाना राष्ट्र संदेश बनाई।

 

क्या है जगन और शर्मिला का किस्सा?

जगन मोहन रेड्डी और उनकी बहन वाई एस शर्मिला का किस्सा भी ऐसा ही था। कांग्रेस से अलग होने के बाद जगन मोहन रेड्डी, उनकी मां और बहन वाई एस शर्मिला ने ही वाईएसआर कांग्रेस पार्टी बनाई थी। जब-जब जगह मोहन जेल गए तब वाई एस शर्मिला ने ही पार्टी की कमान संभाली। हालांकि, कहा जाता है कि संपत्ति के बंटवारे को लेकर मनमुटाव इतना बढ़ा कि शर्मिला आंध्र प्रदेश छोड़कर तेलंगाना शिफ्ट हो गईं और वहां वाईएसआर तेलंगाना पार्टी बनाकर वहां अपनी जमीन तलाशने लगीं। हालांकि, उनका वह प्रयास कामयाब होता नहीं दिख रहा था।

 

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जनवरी 2024 में वाई एस शर्मिला अचानक अपनी पुरानी पार्टी यानी कांग्रेस में लौट आईं और वाईएसआर तेलंगाना का विलय कर दिया। यहां से वह अपने ही भाई के खिलाफ मुखर हो गईं क्योंकि आंध्र प्रदेश में अब कांग्रेस और वाईएसआर कांग्रेस प्रतिद्वंद्वी हैं। कांग्रेस ने वाई एस शर्मिला को ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी बनाया है।

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