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'100 से ज्यादा पाकिस्तानी मारे, जमीनी हमले के लिए तैयार थे'- आर्मी चीफ

आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के वक्त भारतीय सेना इस कदर तैयार थी कि अगर पाकिस्तान कोई गलती करता तो जमीनी हमले भी किए जाते।

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जनरल उपेंद्र द्विवेदी, Photo Credit: Social Media

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भारतीय सेना ने अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक बार फिर से ऑपरेशन सिंदूर, आतंकवाद और सेना के कामकाज को लेकर कई अहम बातें रखी हैं। ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि भारतीय सेना उस वक्त जमीनी हमले के लिए पूरी तरह से तैयार थी। परमाणु हमले की चर्चा को लेकर उन्होंने जवाब दिया कि DGMO स्तर की बातचीत में ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई थी, बस नेता लोग ऐसी बयानबाजी कर रहे थे। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर तीनों सेनाओं के साथ काम करने और स्पष्ट राजनीतिक निर्देशों का शानदार उदाहरण था।

 

उन्होंने एक बार फिर से दोहराया कि भविष्य में अगर ऐसी कोई हरकत होती है तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आर्मी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, 'आपको पता होगा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है और भविष्य में भी वैसा ही जवाब दिया जाएगा। मैं इसमें देश के सभी स्टेकहोल्डर्स की हिस्सेदारी की तारीफ करना चाहूंगा जिसमें केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बल, इंटेलिजेंस, सिविक संस्थाएं, राज्य प्रशासन और अन्य मंत्रालय जैसे कि गृह मंत्रालय रेलवे आदि शामिल हैं।'

 

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ऑपरेशन सिंदूर पर क्या बोले आर्मी चीफ?

 

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आगे कहा, 'पहलगाम हमले के बाद उच्च स्तर पर एक फैसला लिया गया कि एक निर्णायक जवाब दिया जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर का प्लान तैयार हुआ और इसे बेहद सटीक तरीके से अंजाम दिया गया। 7 मई को 22 मिनट की उस शुरुआत ने इसे 10 मई तक यानी 88 घंटों तक जारी रखा। यह ऑपरेशन रणनीतिक मान्यताओं को फिर से स्थापित करने, गहरे जख्म देने और आतंक के अड्डों को खत्म करने के साथ-साथ लंबे समय से दी जा रही धमकियों का जवाब देने के लिए था।'

 

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न्यूक्लियर रेटरिक से जुड़े एक सवाल के जवाब में आर्मी चीफ ने कहा, 'जहां तक न्यूक्लियर रेटरिक की बात है, मैं आपको बताना चाहूंगा कि DGMO स्तर की बातचीत में ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई। सिर्फ पाकिस्तान में स्थानीय जनता और कुछ नेता ऐसे बयान दे रहे थे। पहले बोला जाता था कि कन्वेंशनल ऑपरेशन के लिए जगह कम होती जा रही है और यह होता था कि सब कन्वेंशनल से हम सीधे न्यूक्लियर डोमने में जाएंगे। इस बार जो हमने कार्रवाई की, वह सब इसलिए हुई थी क्योंकि हमने कन्वेंशनल स्पेस को बढ़ाया। आर्मी का मोबलाइजेशन इस तरह का था कि अगर पाकिस्तान कोई गलती करता तो हम ग्राउंड ऑपरेशन के लिए तैयार थे।'

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