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'एक हफ्ते में ट्रायल हो...', 30 हफ्ते के गर्भ वाले केस में SC ने क्या-क्या कहा? 

रेप के चलते गर्भवती हुई 15 साल की पीड़िता के गर्भपात के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार को नियमों में बदलाव के बारे में विचार करना चाहिए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

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सिर्फ 15 साल की एक रेप पीड़िता गर्भवती है। सुप्रीम कोर्ट ने उसके गर्भपात का आदेश दिया था। अब गर्भ के 30 हफ्ते यानी लगभग 7.5 महीने हो चुके हैं तो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने याचिका दायर करके अपील की थी कि सुप्रीम कोर्ट अपने इस फैसले को पलटे। अब सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला पलटने से इनकार कर दिया है और कहा कि इस पर परिवार और पीड़िता की राय ली जाए। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी नसीहत दी है कि ऐसे मामलों में ट्रायल एक हफ्ते में पूरा हो ताकि किसी को भी ये सब न झेलना पड़े।

 

सुप्रीम कोर्ट ने इसी महीने की 24 तारीख को अपना फैसला सुनाया था कि 15 वर्षीय पीड़िता का गर्भ उसकी इच्छा के खिलाफ है इसलिए उसका गर्भपात कराया जाए। अब AIIMS ने यह कहते हुए इस फैसले को पलटने की अपील की थी कि अब भ्रूण में जान आ चुकी है और गर्भपात सफल नहीं होगा। AIIMS का कहना है कि पैदा होना होने वाला बच्चा ऐसी बीमारियों के साथ जन्म लेगा, उसके अंग भी फेल हो सकते हैं। इसके अलावा, पीड़िता भी आजीवन कई समस्याओं से जूझ सकती है और हो सकता है कि वह दोबारा कभी मां भी न बन पाए।

 

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिय जॉयमाला बागची की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। AIIMS की ओर से पेश हुए अडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि वह नाबालिग पीड़िता के परिवार से बात करें और उनसे पूछें कि पीड़िता इस बच्चे को पैदा करना चाहती है या नहीं। कोर्ट ने अब पूरा मामला पीड़िता और उसके परिवार पर छोड़ दिया है।

कोर्ट ने भी इस पर चिंता जताई है कि अगर पीड़िता इस बच्चे को पैदा करने का फैसला लेती है तो उसे जीवनभर का ट्रॉमा झेलना होगा। सुप्रीम कोर्ट का कहना है वह इस उम्र में पीड़िता पर मां बनने का दबाव बना सकता है। देश की सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा है कि नाबालिग  के रेप के मामले में गर्भपात का फैसला पूरी तरह से पीड़िता का होना चाहिए। चीफ जस्टिस ने इस मामले में मीडिया से भी संवेदनशीलता बरतने को कहा है। साथ ही, यह भी कहा कि कोर्ट की हर बात को रिकॉर्ड न किया जाए क्योंकि यह नाबालिग लड़की के रेप का मामला है।

 

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केंद्र सरकार को नसीहत

इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नसीहत दी कि ऐसे नियम बनाए जाएं के रेप के ऐसे मामलों में ट्रायल एक हफ्ते के अंदर पूरा हो और नाबालिग पीड़िता को इतने लंबे समय पर परेशानी न झेलनी पड़े। 

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि रेप के केस में 20 हफ्ते से ज्यादा के गर्भ को भी गिराने की छूट देने के लिए नियमों में बदलाव पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही, यह भी कहा कि समय के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है और रेप से होने वाली प्रेग्नेंसी के मामले में कोई अपर लिमिट नहीं रखनी चाहिए।

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