ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस के बाद भारत, बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन क्यों हो रहा?
भारत के दो राज्यो कर्नाटक और आंध्र प्रदेश ने सोशल मीडिया को करने का फैसला किया है। ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस इस तरह का बैन पहले ही लगा चुके हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर । Photo Credit: AI Generated
दुनिया के दूसरे देशों से शुरू होकर बच्चों और किशोरों के लिए होने वाले सोशल मीडिया बैन की लहर अब भारत तक पहुंच चुकी है। डिजिटल दुनिया में बढ़ते खतरे और बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच भारत के दो प्रमुख राज्यों, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का एलान कर दिया है। जहां कर्नाटक सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन करने की घोषणा की है वहीं आंध्र प्रदेश सरकार 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन करने पर विचार कर रही है।
दुनिया में ऑस्ट्रेलिया जैसे देश इस तरह का कदम पहले ही उठा चुके हैं। विश्व स्तर पर भी कई देश बच्चों को ऑनलाइन जोखिमों से बचाने के लिए समान प्रतिबंध लागू कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है लेकिन इसके कार्यान्वयन में चुनौतियां भी हैं।
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कर्नाटक ने लगाया बैन
कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से इस संबंध में राय मांगी। उन्होंने कहा कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया और मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जा रहा है। कर्नाटक में यह कदम बढ़ते स्क्रीन टाइम, मोबाइल एडिक्शन, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और ऑनलाइन सुरक्षा के मुद्दों को देखते हुए उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल नाबालिगों पर लागू होगा और वयस्क छात्रों को प्रभावित नहीं करेगा।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में अगले 90 दिन के अंदर 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर रोक लगा दी जाएगी। इससे पहले कर्नाटक सरकार ने भी इस तरह की घोषणा की थी। विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस बात पर भी चर्चा कर रहे हैं कि क्या इस रोक को 13 से 16 साल के बच्चों तक बढ़ाया जाए। नायडू ने कहा, 'निश्चित रूप से, हम यह पक्का करेंगे कि 90 दिन के अंदर 13 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल न कर सकें।’
किन देशों में लगा प्रतिबंध?
इसके पहले दुनिया के कई देशों में सोशल मीडिया को लेकर प्रतिबंध लगाया गया है। सोशल मीडिया पर सबसे पहले बैन लगाने वाला देश ऑस्ट्रेलिया है उसके बाद फ्रांस ने भी इस पर बैन लगाया था। अब इंडोनेशिया, डेनमार्क और यूके सहित अन्य भी तमाम देश इस पर बैन लगाने पर विचार कर रहे हैं।
इंडोनेशिया की संचार और डिजिटल मामलों की मंत्री मेउत्या हाफिद ने शुक्रवार को कहा कि देश में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। हाफिद ने मीडिया को दिए एक बयान में कहा कि उन्होंने अभी-अभी एक सरकारी नियम पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके जरिए 16 साल से कम उम्र के बच्चे अब यूट्यूब, टिकटॉक, फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, बिगो लाइव और रोब्लोक्स जैसे जोखिम भरे डिजिटल मंचों पर अकाउंट नहीं बना सकेंगे।
ये प्रतिबंध क्यों लगाए जा रहे हैं?
इस प्रतिबंध के पीछे का मुख्य कारण बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा है। स्टडी से पता चलता है कि सोशल मीडिया ज्यादा उपयोग से चिंता, डिप्रेशन, नींद में कमी और फोकस में कमी आती है। ऑनलाइन बुलिंग और अनैतिक कॉन्टेंट बच्चों को भावनात्मक रूप से प्रभावित करती है।
युवाओं में स्क्रीन का ज्यादा उपयोग सामाजिक और आर्थिक लागत बढ़ा रहा है। वैश्विक स्तर पर ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2025 में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, एक्स आदि पर प्रतिबंध लगा दिया। कारण समान हैं- बच्चों को डिजिटल जोखिमों से बचाना। इसी तरह, डेनमार्क ने नवंबर 2025 में 15 वर्ष से कम उम्र के लिए प्रतिबंध की घोषणा की। हालांकि, माता-पिता 13 वर्ष से ऊपर के बच्चों को सोशल मीडिया यूज करने परमिशन दे सकते हैं। फ्रांस ने जनवरी 2026 में 15 वर्ष से कम उम्र के लिए कानून पारित किया, जिसे राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने समर्थन दिया।
दुनिया के अन्य देश भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जर्मनी, ग्रीस, मलेशिया, स्लोवेनिया और स्पेन जैसे देश 15-16 वर्ष की उम्र सीमा के साथ बैन लगाने पर विचार कर रहे हैं। इटली और बेल्जियम ने भी समान कानून लागू किए हैं। हालांकि, कुछ देशों में सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध हैं, जैसे चीन जहां फेसबुक, ट्विटर आदि ब्लॉक हैं और घरेलू विकल्पों को बढ़ावा दिया जाता है। उत्तर कोरिया में इंटरनेट पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध है।
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ये प्रतिबंध जारी क्यों हैं?
वैश्विक स्तर पर सोशल मीडिया के निगेटिव प्रभावों पर बहस बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चे भावनात्मक रूप से बहुत सी चीजों के लिए तैयार नहीं होते हैं। हालांकि, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह डिजिटल स्वतंत्रता का हनन है। दूसरी एक आलोचना इसकी यह भी कह के की जा रही है कि आखिर सोशल मीडिया के लिए उम्र का वेरिफिकेशन किस तरह से किया जाएगा और बच्चों को माता-पिता के या किसी अन्य के नाम से अकाउंट बनाकर यूज़ करने से कैसे रोका जा सकेगा?
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