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कमी के बावजूद बच्चों के खिलाफ बढ़े अपराध, हालात चिंताजनक

एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों से पता चला है कि देश भर में कुल मिलाकर अपराध में कमी आने के बावजूद बच्चों के खिलाफ अपराध बढ़ते जा रहे हैं।

ncrb report 2026

प्रतीकात्मक तस्वीर। Photo Credit- Chatgpt

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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ताजे आंकड़े जारी कर दिए गए हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक साल 2024 में भारत में बच्चों के खिलाफ हुए प्रत्येक 10 में से लगभग नौ साइबर अपराधों में बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री भेजना शामिल रहा है। एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों से पता चला है कि देश भर में कुल मिलाकर अपराध में कमी आने के बावजूद बच्चों के खिलाफ अपराध बढ़ते जा रहे हैं।

 

साल 2024 में पूरे भारत में बच्चों के खिलाफ अपराध के कुल 1,87,702 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2023 के 1,77,335 मामलों से 5.8 प्रतिशत अधिक थे। इसके उलट, पिछले चार साल में भारत में कुल अपराध में लगभग 10.8 प्रतिशत की कमी आई है, जो 2020 में 66.01 लाख मामलों से घटकर 2024 में 58.86 लाख मामले हो गए।

 

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बच्चों के खिलाफ बढ़ा अपराध

इसी दौरान, बच्चों के खिलाफ अपराध 2020 में 1,28,531 मामलों से बढ़कर 2024 में 1,87,702 हो गए जो 46 प्रतिशत से अधिक की चिंताजनक बढ़ोतरी दर्शाती है।  ‘चाइल्ड राइट्स एंड यू’ (क्राई) संस्था द्वारा एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 2024 में बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध के संबंध में सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत 1,238 मामले दर्ज किए गए, जो बच्चों के खिलाफ सभी अपराध का लगभग 0.7 प्रतिशत हैं।

 

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छत्तीसगढ़ में बच्चों से अधिक साइबर अपराध

इनमें से 1,099 मामलों में बच्चों का अश्लील तरीके से चित्रण करने वाली सामग्री प्रकाशित या प्रसारित की गई जबकि बाकी सभी श्रेणियों के कुल मामले सिर्फ 139 थे। क्राई के राज्य-वार एनसीआरबी डेटा के विश्लेषण के अनुसार, छत्तीसगढ़ में बच्चों के खिलाफ सबसे ज़्यादा 268 साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गए। इसके बाद राजस्थान (174), दिल्ली (151), उत्तर प्रदेश (137) और केरल (92) का स्थान रहा। इन पांच राज्यों में कुल मिलाकर देश में दर्ज ऐसे सभी मामलों का 66.4 प्रतिशत हिस्सा था।

 

क्राई में कार्यक्रम निदेशक सोहा मोइत्रा ने कहा, 'एनसीआरबी द्वारा जाहिर हालिया साइबर अपराध प्रवृत्तियां एक बार फिर इस बात को रेखांकित करती हैं कि ऑनलाइन स्पेस में बच्चों की सुरक्षा एक राष्ट्रीय प्राथमिकता क्यों बनी रहनी चाहिए।'


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