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जयशंकर की कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से हुई फोन पर क्या बात हुई?

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से फोन पर बातचीत की। यह प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के कार्यभार संभालने के बाद दोनों देशों के बीच पहली मंत्रिस्तरीय बातचीत थी।

Jaishankar talks with Anita Anand

जयशंकर, Photo Credit: PTI

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को कनाडा की नई विदेश मंत्री अनीता आनंद से टेलीफोन पर बातचीत की। यह बातचीत मार्क कार्नी के कनाडा के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों के बीच पहली मंत्री स्तरीय वार्ता थी। इस बातचीत की जानकारी देते हुए जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ सार्थक चर्चा हुई। भारत-कनाडा संबंधों की संभावनाओं पर विचार साझा किए। उन्हें सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं देता हूं। वहीं, विदेश मंत्री अनीता आनंद ने बताया कि यह बातचीत द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और साझा प्राथमिकताओं पर सहयोग को केंद्रित थी।

 

 

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जयशंकर से हुई मुलाकात पर क्या बोलीं अनीता?

इस बातचीत को 'प्रोडटक्टिव' बताते हुए कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने कहा, 'कनाडा-भारत संबंधों को मजबूत करने, हमारे आर्थिक सहयोग को गहरा करने और साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने पर आज की सार्थक चर्चा के लिए मंत्री जयशंकर को धन्यवाद। मैं भविष्य में मिलकर काम करने को लेकर उत्साहित हूं।' 58 वर्षीय अनीता आनंद भारतीय मूल की हैं और लिबरल पार्टी की वरिष्ठ नेता हैं। विदेश मंत्री बनने से पहले वह कनाडा की रक्षा मंत्री के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं।

 

 

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भारत-कनाडा संबंधों में सुधार की उम्मीद

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अनीता आनंद को उनकी नई जिम्मेदारी संभालने पर पहले ही बधाई दी थी और भारत-कनाडा संबंधों में सुधार की उम्मीद जताई थी। हाल ही में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान, जब उनसे कनाडा के खुफिया प्रमुख की भारत यात्रा के बाद द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'हमारी आशा है कि हम आपसी विश्वास और संवेदनशीलता के आधार पर अपने संबंधों को फिर से मजबूत कर सकते हैं।'

 

भारत ने लंबे समय से कनाडा पर खालिस्तानी समूहों सहित चरमपंथी और अलगाववादी तत्वों को पनाह देने का आरोप लगाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस संदर्भ में स्पष्ट किया कि द्विपक्षीय संबंधों में आई खटास की जड़ कनाडा में 'चरमपंथी और अलगाववादी तत्वों को दी गई छूट' है।


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