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'पुलवामा हमले में तुम्हारा हाथ,' पुलिस बन साइबर ठगों ने शख्स से वसूले 10 लाख

सोशल मीडिया या किसी मैसेजिंग ऐप पर अगर कोई पुलिसकर्मी आपको धमकाता है, पैसे मांगता है तो उसे नजर अंदाज करें। पुलिस ऐसी धमकी किसी को नहीं देती है, न ही ऑनलाइन पैसे मांगती है।

Cyber Crime

प्रतीकात्मक तस्वीर। (AI Image, Photo Credit: Sora)

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दिल्ली पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े कांड का पर्दाफाश किया है। कुछ साइबर ठगों ने यूपी एटीएस अधिकारी बनकर एक शख्स से 10 लाख रुपये की ठगी की है। साइबर ठगों ने खुद को ATS के तौर पर पेश किया। उन्होंने एक 30 साल के युवक को निशाना बनाया। एक फर्जी ATS अधिकारी ने धमकी दी कि युवक का नाम पुलवामा आतंकी हमले में आया है। युवक, डरकर वह सब करता गया जो साइबर ठग उससे कहते। 

दिल्ली पुलिस के मुताबिक साइबर ठगों ने युवक को यह मानने पर मजबूर कर दिया कि वह डिजिटली अरेस्ट हो गया है। अब उसके जेल जाना होगा। थोड़ी देर में वे घर में दस्तक देंगे। नकली यूपी एटीएस ने शख्स के कहा कि तुम्हारा हाथ साल 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले में है। 

आरोपियों ने पीड़ित पर दबाव बनाया। उन्होंने लंबी जेल की धमकी दी और कहा कि उसका नाम टेरर फंडिंग में भी सामने आया है। उसे बैंक खातों से आतंकियों को मदद पहुंचाई गई है। आरोपी ने कथित तौर पर पीड़ित को बरगलाया और दावा किया कि उसका नाम आतंकवाद से संबंधित वित्तीय लेनदेन में सामने आया है। इन आरोपों को सुनकर युवक डर गया और वह साइबर ठगों की बात मानता चला गया।

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कौन है आरोपी?

आरोपी दिल्ली के करोल बाग का रहने वाला है। यह घटना अगस्त महीन में हुई है लेकिन 14 अक्तूबर को पीड़ित युवक ने पुलिस में तहरीर दी। पुलिस केस की छानबीन में जुटी है। आरोपियों के बारे में कोई जानकारी अब तक हासिल नहीं हो पाई है। 
 
युवक ने FIR में लिखा है, '13 अगस्त को 4 अनजान नंबरों से मुझे कई कॉल आए। मुझ पर पुलवामा आतंकी हमले में शामिल होने के आरोप लगाए गए। साइबर ठगों ने कहा कि कश्मीर में मेरे नाम से खोले गए बैंक खाते में 50 लाख रुपये जमा हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि खाता मेरी आईडी और मोबाइल नंबर से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि अगर मैंने पैसे भेजे तो बख्श दिया जाएगा। धमकी देने वालों ने कहा कि इसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल हैं, तुम बचोगे नहीं।'

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कैसे हुई डिजटल ठगी?

पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने पीड़ित को पहले वीडियो कॉल करने पर मजबूर किया था। वे पुलिस की वर्दी में थे। बैकग्राउंड में यूपी एटीएस का चिह्न लगा था। पीड़ित शख्स ने FIR में लिखा, 'उन्होंने मुझे अपना कैमरा चालू करने के लिए कहा। उन्होंने शक्ल दिखाकर अपना कैमरा ऑफ कर दिया। मुझसे कहा कि परिवार के किसी भी सदस्य को इस संबंध में कोई जानकारी न दें। उन्होंने मुझसे पूछताछ की। मेरे बैंक डीटेल्स हासिल किए। मुझसे कहा कि आपकी कॉल यूपी एटीएस के हेड को ट्रांसफर की जा रही है। एक शख्स जुड़ा भी।' 

पुलिस ने कहा, 'यूपी एटीएस के हेड बने शख्स ने कहा कि अगर इस खाते में रकम ट्रांसफर नहीं की गई तो UAPA के तहत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने RBI का एक जाली दस्तावेज भेजा। शख्स धमकी से डर गया। उसने एक खाते से 8.9 लाख रुपये भेजे, बाकी बचे पैसे पेटीएम से ट्रांसफर  किया।'

जब पैसे कट गए तब युवक को असलियत की भनक लगी होगी। आरोपियों ने उससे 4 लाख रुपये और मांगे। उन्होंने कहा कि अगर जमानत चाहिए तो 4 लाख रुपये और जमा करो। युवक ने इनकार किया तो आरोपियों ने फोन काट दिया। पीड़ित ने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज की। करोल बाग पुलिस इस केस की छानबीन कर रही है। 

 


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