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एक वीडियो में क्या दिखा कि हाई कोर्ट ने ठेले वाले पर लगाया 10 हजार का जुर्माना?

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक रेहड़ी वाले पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। याचिकाकर्ता ने अपनी रेहडी़ के पास नाले के ऊपर बैठने की जगह बनाई थी।

High Court

सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit: Freepik

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दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में एक रेहड़ी वाले पर  जुर्माना लगाया है। जिस रेहड़ी-पटरी वाले पर जुर्माना लगाया गया है उसने दिल्ली नगर निगम (MCD) पर कई आरोप लगाए थे। उसका कहना था कि दिल्ली नगर निगम ने उसको परेशान किया है। मामले पर सुनवाई के दौरान नगर निगम ने बताया कि उसने अवैध कब्जा किया हुआ है। जांच में पता चला कि उसने पक्का स्ट्रक्चर बना लिया है और नाले पर कब्जा कर लिया है। इसके बाद कोर्ट ने उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया। 

 

रेहड़ी पटड़ी वाले ने कोर्ट में अर्जी लगाई थी कि दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारी उसे परेशान कर रहे हैं, जबकि उसके पास  वैलिड सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग (COV) हैं। कोर्ट में सुनवाई के बाद  जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और मधु जैन की बेंच ने वेंडर की अर्जी खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना।

 

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MCD पर क्या आरोप लगाए थे?

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसके पास वैध सर्टिफिकेट है और वह अपनी रेहड़ी के आसपास स्वच्छता का भी पूरा ध्यान रख रहा है। अपने इस दावे को साबित करने के लिए उसने साइट के कुछ फोटो भी कोर्ट में पेश किए। उसने अधिकारियों पर उसे जानबूझकर परेशान करने के आरोप लगाए। हालांकि, एमसीडी के अधिकारियों ने उसके आरोपों और दावों को झूठा बताया। 

 

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि वह गाजीपुर की मछली मंडी में रेहड़ी लगाता है और उसके पास वेंडिग सर्टिफिकेट है। याचिकाकर्ता ने कहा कि MCD ने उसे शांति से रेहड़ी लगाने की इजाजत नहीं दी। और आरोप लगाया कि अधिकारी उसको परेशान कर रहे हैं। MCD के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता ने एक पक्का स्ट्रक्चर बना लिया था, नाले को ढक दिया था और दीवार के ठीक बगल वाले रास्ते का इस्तेमाल कर रहा था। इसके बाद MCD और याचिकाकर्ता की ओर से जमा की गई फोटो पर कोर्ट में विवाद हो गया। 

कोर्ट ने किया वीडियो कॉल

दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ही एमसीडी अधिकारियों को उस साइट से लाइव वीडियो कॉल करने के लिए कहा। वीडियो कॉल पर कोर्ट ने पूरी साइट देखी। कोर्ट ने पाया कि एमसीडी ने जो तस्वीरें कोर्ट में पेश की थीं वह सही थी। याचिकाकर्ता ने रेहड़ी वाली जगह पर पर्मानेंट स्ट्रक्चर बनाया था। कोर्ट का मानना है कि याचिकाकर्ता ने यह याचिका फाइल करने के लिए उसका कुछ हिस्सा तोड़ दिया होगा लेकिन वहां पर्मानेंट स्ट्रक्चर मौजूद है। 

 

याचिकाकर्ता ने अपनी रेहड़ी के पास नाले को ढककर लोगों के बैठने के लि स्ट्रक्चर बनाया है। कोर्ट ने वीडियो कॉल में देखा कि नाला पूरी तरह मलबे से भरा हुआ है। MCD ने जो तस्वीरें कोर्ट में पेश की थी वह तस्वीरें बिल्कुल सही थी। कोर्ट ने पूरी साइट और उसके पास मौजूद नाले को ध्यान से देखा और पाया की याचिकाकर्ता ने गलत तस्वीरें कोर्ट में पेश की थी। 

 

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कोर्ट ने खारिज की याचिका

वीडियो कॉव पर सच्चाई देखने के बाद कोर्ट ने याचिकर्ता की याचिका खारिज कर दी। वेंडिंग सर्टिफिकेट जारी करने के साथ-साथ कुछ शर्तें भी होती हैं लेकिन याचिकाकर्ता ने उन शर्तों का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने कहा कि इन हालातों में याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता  और MCD कानून के तहत कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। इसके साथ ही कोर्ट ने MCD को नाले की सफाई करने के लिए भी कहा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दो हफ्ते के अंदर दिल्ली हाई कोर्ट लीगल सर्विस कमेटी के पास 10 हजार रुपये जमा करने के लिए कहा है। 

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