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जानवरों की खाल से बने बायोस्टिमुलेंट्स पर बैन, खेती में होता था यूज

केंद्र सरकार ने जानवरों की खाल और पंख से बनने वाले 11 बायोस्टिमुलेंट्स की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। ऐसा क्यों हुआ? जानते हैं।

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कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान। (Photo Credit: PTI)

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केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए जानवरों से बनने वाले 11 बायोस्टिमुलेंट्स की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। ये बायोस्टिमुलेंट्स मुर्गी के पंख, सुअर के टिशू, गोवंश की खाल या मछली के स्केल से बनाए जाते हैं। यह फैसला हिंदू और जैन समुदाय की आपत्ति के बाद लिया गया है। 


बायोस्टिमुलेंट्स फसलों की क्वालिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। यह फर्टिलाइजर या पेस्टिसाइड्स की तरह नहीं होते। बल्कि यह प्रोटीन से भरपूर होते हैं। इनका इस्तेमाल धान, टमाटर, आलू, खीरा, मिर्च, हरा चना, कॉटन, सोयाबीन और अंगूर जैसी फसलों में किया जाता है।

 

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क्यों लगाया गया है बैन?

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हाल ही में हिंदू और जैन समुदाय के लोगों ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की थी, जिसमें इन बायोस्टिमुलेंट्स पर बैन लगाने की मांग की गई थी।


हिंदू और जैन समुदाय का कहना है कि इन बायोस्टिमुलेंट्स में जानवरों की चमड़ी और पंखों का इस्तेमाल होता है, जिससे उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है। इसके बाद इन 11 बायोस्टिमुलेंट्स की बिक्री और इस्तेमाल पर बैन लगा दिया गया है।

 

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पहले खुलेआम बिकते थे बायोस्टिमुलेंट्स

इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि 2021 से पहले भारत में बायोस्टिमुलेंट्स खुलेआम बेचे जाते थे। इनकी बिक्री और सुरक्षा को लेकर कोई खास नियम नहीं थे। 2021 में सरकार ने इन्हें लेकर नियम बनाए, जिसका मतलब था कि बायोस्टिमुलेंट्स बेचने वाली कंपनियों को रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। 


कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि कई सालों से लगभग 30 हजार बायोस्टिमुलेंट्स बिना किसी जांच के बेचे जा रहे थे और पिछले 4 साल में भी लगभग 8 हजार उत्पाद बिकते रहे। उन्होंने बताया था कि सख्ती करने के बाद यह संख्या घटकर 650 रह गई है।


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