अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा पर झड़प क्यों, क्या इसके पीछे चीन-पाकिस्तान?
अफगानिस्तान में पल रहे आतंकी तालिबान के लिए सबसे बड़ी सिरदर्द बनते जा रहे हैं। अभी तक पाकिस्तान उस पर आतंकियों को पनाह देने का आरोप लगा रहा था। अब ताजिकिस्तान ने भी मोर्चा खोल दिया है। समझते हैं पूरा मामला।

प्रतीकात्मक फोटो। (AI generated image)
26 नवंबर को ताजिकिस्तान के खाटलोन इलाके में एक ड्रोन अटैक में तीन चीनी नागरिकों की जान गई। यह सभी लोग अफगानिस्तान की सीमा के नजदीक एक सोने की खनन में लगी कंपनी में काम कर रहे थे। तभी उन पर ड्रोन से हमला किया गया। चार दिन बाद एक और अटैक हुआ। 30 नवंबर को हथियारों से लैस कुछ लोगों ने दो और चीनी नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया। यह घटना ताजिकिस्तान के दारवोज जिले में हुई। दोनों मजदूर चीन की सरकारी कंपनी चाइना रोड एंड ब्रिज कॉर्पोरेशन में काम करते थे।
उधर, पाकिस्तान में अलगावदी संगठन लगातार चीनी कंपनियों और कर्मचारियों को निशाना बना रहे हैं। इसी साल पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में एक हमले में पांच चीनी नागरिकों की जान गई। वहीं बलूचिस्तान में कई बार चीनी नागरिकों को निशाना बनाकर हमले को अंजाम दिया गया है। पाकिस्तान का आरोप है कि इन हमलों को अफगानिस्तान से अंजाम दिया जाता है। दहशतगर्द पाकिस्तान में घटना को अंजाम देने के बाद अफगानिस्तान भाग जाते हैं।
पाकिस्तान की तरह ही ताजिकिस्तान ने भी अफगानिस्तान पर आरोप लगाया है। वहां के अधिकारियों के मुताबिक चीनी नागरिकों पर हमलों को अफगानिस्तान के बदख्शान प्रांत के गांवों से अंजाम दिया गया। उधर, ताजिकिस्तान में स्थित चीनी दूतावास ने अपने नागरिकों और कंपनियों को सीमावर्ती क्षेत्र खाली करने का आदेश दिया। चीन यही नहीं रुका। उसने ताजिकिस्तान की सरकार पर चीनी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चितित करने का दबाव बनाया, ठीक वैसे ही जैसा वह पाकिस्तान पर बनाता है। चीन के इस कदम के बाद तालिबान और ताजिकिस्तान की सरकार के बीच तनाव है।
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ताजा मामला क्या है
ताजिकिस्तान की सरकार का आरोप है कि दिसंबर में कई बार अफगानिस्तान से आतंकियों ने घुसपैठ की। चीनी नागरिकों के अलावा सशस्त्र बलों को निशाना बनाया। 24 दिसंबर को अफगानिस्तान सीमा से घुसे आतंकियों ने शमसिद्दीन शोखिन जिले में ताजिकिस्तान के दो सीमा रक्षकों की हत्या कर दी। जवाबी कार्रवाई में तीन आंतकी भी मारे गए। इस घटना के बाद से ताजिकिस्तान अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से खफा है।
क्या तालिबान मान रहा अपनी गलती?
ताजिकिस्तान ने आरोप लगाया कि तालिबान सरकार अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों का पालन नहीं कर रही है। वह आतंकियों से लड़ने के अपने वादों को गंभीरता से पूरा नहीं कर रही है। ताजिकिस्तान ने तालिबान से ताजिक जनता से माफी मांगने और सीमा पर सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। प्रतिक्रिया में तालिबान ने कहा कुछ शरारती तत्व ताजिकिस्तान के साथ रिश्तों को बिगड़ने की कोशिश में जुटे हैं। अफगानिस्तान ने चीनी नागरिकों की हत्या पर दुख भी व्यक्त किया।
तालिबान ने ताजिकिस्तान को पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया और कहा कि एक अज्ञात सशस्त्र समूह अस्थिरता और अराजकता पैदा करके अविश्वास को जन्म दे रहा है।
आतंकी हमले के बाद तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन से बात की और बताया कि हमने घटना की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। उन्होंने भविष्य में आतंक के खिलाफ मिलकर काम करने पर भी सहमत जताई।
किसने हमलों को दिया अंजाम?
ताजिकिस्तान की मीडिया के मुताबिक आतंकी हमलों को ताजिकिस्तान के आतंकी संगठन जमात अंसारुल्लाह ने अंजाम दिया है। यह संगठन फिलहाल अफगानिस्तान से संचालित किया जा रहा है। दावा किया जाता है कि इससे जुड़ा हाजी बशीर नूरजई तालिबान के टॉप नेताओं का करीबी है। वह आतंकी गतिविधियों के अलावा अफगानिस्तान से नशीले पदार्थों की तस्करी भी करता है। उधर, तालिबान से जुड़े मीडिया का दावा है कि इन हमलों के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। पाकिस्तान किसी भी तरह ताजिकिस्तान के साथ अफगानिस्तान के रिश्तों को बिगाड़ने की कोशिश में है।
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ताजिकिस्तान और तालिबान में क्यों नहीं बनती?
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार और ताजिकिस्तान के बीच बनती नहीं है। 1990 में ताजिकिस्तान तालिबान के खिलाफ गठबंधन का हिस्सा रहा है। 2021 में अमेरिकी सेना के जाने के बाद तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता पर लौटे। तमाम देशों ने तालिबानी सरकार को मान्यता दी, लेकिन ताजिकिस्तान ने मान्यता देने से मना कर दिया। हालांकि गुपचुप तरीके से दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी रहा। ताजिकिस्तान खुलकर अफगानिस्तान पर आतंकियों को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है। ठीक वैसे ही जैसे पाकिस्तान लगाता है।
अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान के बीच करीब 1340 किमी लंबी सीमा है। ताजिकिस्तान का आंतकी संगठन जमात अंसारुल्लाह अफगानिस्तान की धरती से ही हमलों को अंजाम देता है। यह संगठन अल-कायदा से जुड़ा है। इसके अलावा खुरासान प्रांत में आईएसआईएस से जुड़ा संगठन आईएसकेपी भी सक्रिय है। माना जाता है कि यह संगठन भी ताजिकिस्तान को निशाना बना रहा है। अगर तालिबान ने समय रहते इन संगठनों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाया तो भविष्य में दोनों देशों के बीच रिश्ते बिगड़ने तय हैं।
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