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'जब कर्ज मांगता हूं, सिर झुका होता है', शहबाज ने किया ग्लोबल बेइज्जती का जिक्र

तमाम कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान वित्तीय संकट से ऊबर नहीं पा रहा है। आईएमएफ के अलावा वह हमेशा अन्य देशों से कर्ज हासिल करने की जुगाड़ में होता है। अब शहबाज शरीफ ने खुद ही बताया कि कर्ज लेना कितना बेइज्जती भरा काम है।

Shahbaz Sharif

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ। ( Photo Credit: @CMShehbaz)

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपनी ग्लोबल बेइज्जती का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोस्त मुल्कों ने कभी मायूस नहीं किया, लेकिन हमें सिर झुकाकर कर्ज मांगना पड़ता है। शहबाज शरीफ ने फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ कई देशों की यात्रा का भी उल्लेख किया और बताया कि कैसे इज्जत को दांव पर लगाकर कर्ज मांगना पड़ा। 

 

राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार को पाकिस्तान के बड़ी बिजनेसमैन और नियार्यकों को एक कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। यही पर अपने संबोधन में शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान को आत्मसम्मान की कीमत पर विदेश से कर्ज लेना पड़ता है। बता दें कि पाकिस्तान लंबे समय से वित्तीय संकट से जूझ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) भी कई बार बेलआउट पैकेज का ऐलान कर चुका है।

 

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इमरान खान के बाद साल 2022 में सत्ता संभालने वाले शहबाज शरीफ ने कहा, जब हमने पदभार संभाला तब आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक थी। आम आदमी को बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने संकट के समय पाकिस्तान को कर्ज देने वाले दोस्त मुल्कों का आभार जताया और अपने देश के व्यापारियों को इस बात से भी अवगत कराया कि कर्ज मांगना कितनी बेइज्जती वाला काम है?

'कर्ज मांगने पर सिर झुका होता है'

शहबाज शरीफ ने कहा, 'मैं आपको किस तरह से यह बात बताऊं कि कैसे-कैसे हमने दोस्त मुल्कों से कर्जे लेने के लिए तरख्वास्त दी। उन दोस्त मुल्कों ने हमें मायूस नहीं किया, लेकिन आप जानते हैं कि जो कर्ज मांगने जाता है, उसका सिर झुका होता है। उसके बाद जो दायित्व आते हैं, आपको उसकी भी अच्छी तरह से जानकारी है।'

 

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असीम मुनीर ने भी कई मुल्कों से मांगा कर्ज

उन्होंने आगे कहा, 'मैं यहां आपको बगैर किसी लाग-लपेट के बताना चाहता हूं कि मैं भी और खामोशी के साथ फील्ड मार्शल कई मुल्कों में गए। उनसे कहा कि आईएमएफ का प्रोग्राम है। यह हमारा एक्सटर्नल गैप है। आप इतने बिलियन डॉलर दे दें। मैं उन दोस्त मुल्कों का बेहद शुक्रगुजार हूं। आप जानते हैं कि जब कोई किसी से मांगने जाता है तो उसे अपनी इज्जत की कीमत चुकानी पड़ती है। कभी-कभी अनुचित मांगें सामने आ सकती हैं। आपको उन्हें पूरा करना पड़ता है, भले ही उन्हें पूरा करने का कोई कारण न हो।'

 


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