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ट्रंप ने दिया युद्ध खत्म करने का इशारा, ईरान बोला- दुश्मन हार गया है

अमेरिका अब ईरान के खिलाफ युद्ध खत्म करने पर विचार कर रहा है। शेयर बाजार में भारी गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में इजाफे के बाद ट्रंप की भाषा में बदलाव आया है। हालांकि अभी तक निश्चित टाइलाइन का ऐलान नहीं किया गया है।

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (Photo Credit: DonaldTrump/X)

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20 दिन से अधिक की जंग के बाद भी ईरान के हौसले बुलंद हैं। डोनाल्ड ट्रंप की तमाम कोशिशों के बावजूद ईरान झुकने को तैयार नहीं है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। चौतरफा दबाव के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को सीमित करने का संकेत दिया है। 

 

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'अमेरिका मध्य पूर्व में अपने महान सैन्य कोशिशों को खत्म करने पर विचार करते हुए अपने उद्देश्यों को पूरा करने के बेहद करीब पहुंच रहा है।' ट्रंप के बयान के बाद व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि राष्ट्रपति और पेंटागन ने अनुमान लगाया है कि इस मिशन को पूरा करने में करीब 4 से 6 सप्ताह लगेंगे। 

 

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क्यों बदले डोनाल्ड ट्रंप के सुर?

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से दुनियाभर में हाहाकार मचा है। अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली है। इन्हीं सभी रुझानों की वजह से ट्रंप के रुख में बदलाव आया है। अब ट्रंप प्रशासन ने जहाजों पर लदे ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों को हटाना शुरू कर दिया है, ताकि कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। 28 फरवरी को अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की शुरुआत की थी। अब अनुमान लगाया जा रहा है कि चार से छह सप्ताह में यह अभियान खत्म हो सकता है।

 

डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस के बयान के बावजूद अमेरिका मध्य पूर्व में 2500 मरीन सैनिकों की तैनाती कर रहा है। माना जा रहा है कि इन सैनिकों की तैनाती स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में होगी। जहां ईरानी हमलों के कारण ऑयल शिपिंग प्रभावित हुई है।

 

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'दुश्मन की हार हुई, भ्रम में किया गया था हमला'

फारसी नववर्ष के मौके पर ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपना लिखित संदेश जारी किया। उन्होंने अपने संदेश में दावा किया कि धार्मिक, बौद्धिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि में सभी मतभेदों के बावजूद आप लोगों में जो एकता बनी है, उसी के कारण दुश्मन की हार हुई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल को लगता था कि एक-दो दिन के हमले के बाद ईरान की जनता सरकार को उखाड़ फेंकेगी। मगर यह उनकी घोर गलतफहमी निकली।

 

मोजतबा ने कहा कि युद्ध की शुरुआत इस भ्रम के तहत की गई थी कि अगर ईरानी सरकार के प्रभावशाली लोगों को मार दिया जाता है तो जनता में भय और निराशा पैदा होगी। वहां अपना प्रभाव जमाकर ईरान को विभाजित करने का सपना सच हो जाएगा। इसके बजाय दुश्मन के भीतर खुद ही दरार पैदा हो गई।


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