मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और भारी तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सरकार ने सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की है। UAE पुलिस और साइबर सेल ने फर्जी वीडियो, भ्रामक कंटेंट और भ्रामक पोस्ट साझा करने के आरोप में 19 भारतीयों समेत कुल 35 लोगों को गिरफ्तार करने का आदेश जारी किया है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के बाद यह इलाका युद्ध की स्थिति में है। UAE के अटॉर्नी जनरल डॉ. हमाद सैफ अल शम्सी ने साफ किया कि आरोपियों ने असली घटनाओं को गलत तरीके से दिखाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और गुमराह करने वाले ऑडियो-विजुअल टूल का इस्तेमाल किया। गिरफ्तार किए गए सभी लोगों पर UAE के सख्त कानूनों के तहत फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाया जाएगा।
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AI से बनाए धमाकों के वीडियो
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने तीन अलग-अलग तरीकों से कानून का उल्लंघन किया। एक समूह ने AI का सहारा लेकर विस्फोटों, मिसाइल हमलों और भीषण आग लगने के नकली वीडियो तैयार किए। इन वीडियो को सोशल मीडिया पर इस तरह पेश किया गया जैसे ये घटनाएं UAE के भीतर ही हो रही हों। वहीं, कुछ लोगों ने अन्य देशों में हुए हादसों के पुराने फुटेज को UAE के झंडे और तारीखों के साथ शेयर कर जनता को गुमराह करने की कोशिश की।
गिरफ्तार किए गए लोगों में एक ऐसा ग्रुप भी था जिसने हवा में मिसाइल इंटरसेप्शन के असली वीडियो रिकॉर्ड किए थे लेकिन उनमें डरावने साउंड इफेक्ट और गुमराह करने वाली बातें जोड़ी थीं। अधिकारियों के मुताबिक ऐसा कंटेंट न सिर्फ पब्लिक सेफ्टी के लिए खतरा है, बल्कि देश की डिफेंसिव क्षमताओं के लिए भी नुकसानदायक है।
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1 साल की जेल
UAE प्रशासन ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यहां के साइबर कानून के अनुसार, इस तरह की फर्जी खबरें फैलाने पर दोषियों को कम से कम एक साल की जेल और 1 लाख दिरहम (करीब 23 लाख भारतीय रुपये) से ज्यादा का जुर्माना भरना पड़ सकता है। प्रशासन ने वहां रह रहे प्रवासियों को सख्त हिदायत दी है कि वे बिना पुष्टि के कोई भी संवेदनशील जानकारी या वीडियो साझा न करें।