बांग्लादेश में होने वाले चुनाव से ठीक पहले बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने अंतरिम सरकार और उसके प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर तीखा हमला बोला है। एक इंटरव्यू में तस्लीमा ने कहा कि आज का बांग्लादेश वैसा नहीं रहा जैसा वह पहले जानती थीं। उनके अनुसार देश में कट्टरपंथी ताकतों का प्रभाव बढ़ गया है और लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो चुकी हैं।
एनडीटीवी से बात करते हुए, तस्लीमा नसरीन ने मोहम्मद यूनुस के इरादों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके प्रशासन को सत्ता में लाने वाली असली ताकत इस्लामी कट्टरपंथी थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की चुप्पी की वजह से बांग्लादेश में हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों पर रोजाना हमले हो रहे हैं।
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तस्लीमा नसरीन ने चुनावों की वैधता को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अवामी लीग के बिना, इन चुनावों का कोई कानूनी आधार नहीं है और ये सत्ता में बने रहने का सिर्फ एक फर्जी तरीका है।
तस्लीमा का छलका दर्द
तस्लीमा नसरीन ने देश की वर्तमान स्थिति को भय और अराजकता का युग करार दिया। उन्होंने दर्द साझा करते हुए कहा कि बांग्लादेश की पहचान से जुड़े प्रतीकों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं, सांस्कृतिक संगठनों को राख किया जा रहा है और निर्दोष पत्रकारों को सलाखों के पीछे भेजा जा रहा है। विडंबना यह है कि जिहादी सड़कों पर खुलेआम घूम रहे हैं क्योंकि शासन को उनका समर्थन प्राप्त है।'
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तस्लीमा नसरीन ने यूनुस सरकार पर इतिहास से छेड़छाड़ करने का बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार 1971 के मुक्ति संग्राम की यादों को मिटाकर उन लोगों को मुख्यधारा में ला रही है जिन्होंने पाकिस्तान का साथ दिया था और लाखों बंगालियों के नरसंहार में शामिल थे।
अल्पसंख्यकों की आवाज दबाने की कोशिश
हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए तस्लीमा नसरीन ने कहा कि यह सरकार का अल्पसंख्यकों को डराने का एक तरीका है। चिन्मय दास का अपराध केवल इतना था कि उन्होंने हिंदुओं को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना सिखाया।