बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले अहम राष्ट्रीय चुनावों से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी कड़ी में जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने देश में नागरिकों के अधिकारों और समानता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि बांग्लादेश में कोई भी व्यक्ति दूसरे दर्जे का नागरिक नहीं है और सभी लोग पहले दर्जे के नागरिक हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब बीते कुछ महीनों में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाओं को लेकर देश और विदेश में चिंता जताई जा रही है।
मीडिया से बातचीत में शफीकुर रहमान ने कहा कि धर्म के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, 'धर्म चाहे जो भी हो, सभी बांग्लादेशी नागरिक हैं। मैं किसी को अल्पसंख्यक नहीं मानता। हम सब बांग्लादेशी हैं और सभी बराबर हैं।' जमात प्रमुख ने यह भी साफ किया कि वह समाज को बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक के आधार पर बांटने के पक्ष में नहीं हैं और देश की एकता को सबसे ऊपर मानते हैं।
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भारत के साथ बांग्लादेश के रिश्तों पर सवाल पूछे जाने पर शफीकुर रहमान ने कहा कि भारत देश का सबसे नजदीकी पड़ोसी है, इसलिए उसके साथ संबंध हमेशा प्राथमिकता में रहेंगे।
प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं शफीकुर रहमान?
प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल का शफीकुर रहमान ने सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'मुझे नहीं पता,' और ऊपर की ओर इशारा किया। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव का नतीजा देश के पूरे माहौल और कई बातों पर निर्भर करता है, और चुनाव के निष्पक्ष होने पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
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मैदान में हैं कितने उम्मीदवार?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन ने बताया कि इस बार 51 पार्टियां चुनाव लड़ रही हैं और कुल 2,034 कैंडिडेट अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिनमें से 275 इंडिपेंडेंट हैं। बीएनपी ने धान का गट्ठा सिंबल पर सबसे ज्यादा 291 कैंडिडेट उतारे हैं। इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश 258 कैंडिडेट के साथ दूसरे नंबर पर है। जमात-ए-इस्लामी ने 229 कैंडिडेट, जातीय पार्टी ने 198 कैंडिडेट और एनसीपी ने 32 कैंडिडेट उतारे हैं। 76 इंडिपेंडेंट फुटबॉल सिंबल पर चुनाव लड़ रहे हैं।