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जिस ICT ने शेख हसीना को सुनाई मौत की सजा, उसका इतिहास जानते हैं?

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को ICT ने फांसी की सजा सुनाई है। इसके बारे में बहुत चर्चा हो रही है। क्या हैं ICT, जानते हैं इसके बारे में।

Sheikh Hasina

शेख हसीना, Photo Credit- Social Media

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को 'मानवता के खिलाफ अपराध' का दोषी पाया गया। देश की इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाई। पिछले साल 5 अगस्त को देश छोड़कर शेख हसीना भारत आई और पिछले 15 महीनों से दिल्ली में शरण ले रखी हैं। अब सवाल उठता है कि ICT क्या है और इसके फैसलों के मायने क्या है?

 

ICT के फैसले के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर भारत से शेख हसीना को सौंपने की अपील की है। दोनों देशों के बीच 2013 में प्रत्यर्पण संधि साइन हुई थी, जिसमें उनके बीच अपराधियों के एक्सचेंज की शर्तें हैं।

 

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ICT की शर्तें

 

ICT के तहत किसी अपराधी को प्रत्यर्पित तब किया जाता है, जब दोनों देशों में वह अपराध माना जाए, कम से कम 1 साल की सजा मिली हो और आरोपी पर अरेस्ट वारंट हो। इसी आधार पर भारत ने 2020 में शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या के दो दोषियों को बांग्लादेश भेजा था।

ICT का इतिहास

ICT का आधार अंतरराष्ट्रीय अपराध (न्यायाधिकरण) अधिनियम 1973 है, जिसे बांग्लादेश की आजादी के तुरंत बाद शेख मुजीबुर्रहमान की सरकार ने पारित किया था। इसका उद्देश्य 1971 के समय पाकिस्तान सेना और उनके स्थानीय सहयोगियों (जैसे रजाकार, अल-बद्र, अल-शम्स) के किए गए नरसंहार, सामूहिक बलात्कार और अन्य जघन्य अपराधों के संदिग्धों पर मुकदमा चलाना था।

  • 2010 में शेख हसीना की सरकार ने ICT को एक्टिव किया ताकि 1971 के युद्ध अपराधों की जांच और सुनवाई हो सके। 1973 के इस कानून को 2009 में संशोधित किया गया और वर्ष 2010 में ढाका में औपचारिक रूप से इसकी स्थापना की गई।

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  • शेख हसीना और अवामी लीग ने 2008 के आम चुनावों में वादा किया था कि अगर वे सत्ता में आते हैं तो लंबे समय से लंबित वादे को पूरा करने के लिए ICT की स्थापना करेंगे।
  • चुनाव जीतने के बाद, 2009 में कानून में संशोधन किया गया और 2010 में न्यायाधिकरण की नींव रखी गई।
  • यह संसद के कानून से बनी सबसे शक्तिशाली कोर्ट में से एक हैंकिसी भी नेता, मंत्री या पूर्व पीएम को गिरफ्तार, ट्रायल और सजा दे सकती है
  • इसके जज स्वतंत्र तरीके से चुने जाते और हटाए नहीं जा सकते हैंइसकी जांच एजेंसी किसी मंत्रालय को नहीं, सीधे ट्रिब्यूनल को रिपोर्ट करती है
  • ICT ने इससे पहले जमात-ए-इस्लामी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के बड़े नेताओं जैसे- गुलाम आजम, मीर कासिम अली, सलाहुद्दीन कादिर चौधरी को सजा दी।


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