डर या मजबूरी, ईरान से जंग में ट्रंप का साथ क्यों दे रहा ब्रिटेन? इनसाइड स्टोरी
ईरान के हमलों में खाड़ी के देशों में मौजूद अमेरिकी एयर बेस तबाह हो चुके हैं। अब अमेरिका को ब्रिटेन का सहारा है।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और डोनाल्ड ट्रंप। Photo Credit: PTI
ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका को अब ब्रिटेन का साथ मिल गया है। ब्रिटिश सरकार ने शुक्रवार को अमेरिकी सेना को अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। अमेरिका यहां से उन मिसाइल साइटों पर हमले कर सकेगा, जिनकी मदद से होर्मुज स्ट्रेट में ईरान तबाही मचा रहा है। ईरान, होर्मुज में अमेरिकी दखल बर्दाश्त नहीं कर रहा है। अब तक कई जहाजों को तबाह कर चुका है।
डाउनिंग स्ट्रीट की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ब्रिटिश मंत्रियों की बैठक में इस पर चर्चा हुई है। अमेरिका को यूनाइटेड किंगडम के सैन्य बेस को इस्तेमाल करने की इजाजत दी जा रही है। यह मदद, क्षेत्र की सामूहिक आत्मरक्षा के मकसद से की जा रही है। ब्रिटेन, रक्षात्मक कार्रवाई के तहत, इस तरह की मंजूरी दे रहा है।
प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने पहले अमेरिका की इस मांग को खारिज कर दिया था, लेकिन अब उनका रुख बदल गया है। ईरान ने ब्रिटिश सहयोगियों देशों पर हमले किए, जिसके बाद ब्रिटिश सरकार ने अपने रुख में बदलाव करने का फैसला लिया है।
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क्या चाहता है यूनाइटेड किंगडम?
ब्रिटिश सरकार की अपील है कि अब जंग थमनी चाहिए। ईरान, इजरायल और अमेरिका को तनाव कम करने पर जोर देना चाहिए। युद्ध के त्वरित समाधान की जरूरत है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कीर स्टार्मर की आलोचना की थी कि वह मदद नहीं कर रहे हैं।
ब्रिटेन को अपना रुख क्यों बदलना पड़ा?
प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि ब्रिटेन ईरान युद्ध में नहीं हिस्सा लेगा। अब ईरान के हमलों के बाद उन्होंने अमेरिका को ग्लूस्टरशायर स्थित RAF फेयरफोर्ड और हिंद महासागार में अमेरिका-यूके के संयुक्त बेस डिएगो गार्सिया के इस्तेमाल की इजाजत दी है।
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इससे क्या होगा?
अमेरिका के भारी बॉम्बर विमानों के लिए ये बेस बेहद अहम हैं। ब्रिटिश सरकार ने साफ कहा है कि यह केवल रक्षात्मक कार्रवाई है, जिसमें ईरान की मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करना शामिल है। इसकी इजाजत सिर्फ इसलिए दी जा रही है, क्योंकि ईरान, जहाजों पर मिसाइल हमले कर रहा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ऐसा हमला करना क्यों पड़ रहा है?
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है। वह सिर्फ चीन और सहयोगी देशों के जहाजों को आवाजाही की इजाजत दे रहा है। यह वह, समुद्री गलियारा है, जहां से 20 फीसदी तेल गुजरता है। बिना ईरान की मंजूरी से यहां कोई जहाज गुजर नहीं सकती है। अब दुनिया में तेल संकट पैदा हो रहा है। भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों में गैस संकट बढ़ता जा रहा है।
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होर्मुज पर क्या कर सकता है अमेरिका?
अमेरिकी और इजरायली हमलों से ईरान की नौसेना और मिसाइल भंडार को नुकसान पहुंचा है। छोटे जहाजों, माइन शिप और आत्मघाती हमलों से अमेरिका पर अभी खतरा बरकरार है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोलना आसान नहीं है। इसे खुलवाने में 1 से 6 महीने लग सकते हैं।
क्या मजबूरी में अमेरिका की मदद कर रहा है ब्रिटेन?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कीर स्टार्मर को कई बार निशाना बनाया था। उन्होंने कहा था कि ब्रिटेन एक महान सहयोगी था लेकिन अब पर्याप्त मदद नहीं कर रहा। डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की कोशिश की। वह फ्रांस, चीन, ब्रिटेन और नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) जैसे देशों से मद मांग रहे थे।
यूरोपीय देशों ने युद्धपोत भेजने से ही इनकार कर दिया। खिसियाए ट्रंप ने फिर कहा कि उन्हें किसी देश की मदद की जरूरत नहीं है, वह जंग जीत लेंगे। हैरान करने वाली बात यह है कि ट्रंप फिर भी इन देशों से मदद मांगते रहे।
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अब भविष्य की चुनौतियां क्या हैं?
अमेरिका ने बीते सप्ताह, खार्ग द्वीप पर हमला किया था। यहां से ही ईरान का 90 फीसदी कच्चा तेल निर्यात होता है। ईरान पर दबाव बनाने के लिए ऐसे हमले किए जा रहे हैं। अमेरिका का मानना है कि अगर खार्ग आइलैंड पर कब्जा हो गया, तेल ठिकाने तबाह हुए तो ईरान घुटने टेकेगा और जंग खत्म करेगा। खार्ग आइलैंड पर कब्जा तभी हो पाएगा, जब अमेरिका जमीन पर अपनी सेनाएं भेजे।
डोनाल्ड ट्रंप, जमीनी कार्रवाई से इनकार कर रहे हैं। उन्हे एहसास है कि जब आसमान में ईरान से नहीं जीत पा रहे हैं, दो देश संयुक्त होकर लड़ रहे हैं, तब भी हार रहे हैं तो जमीनी लड़ाई और मुश्किल होगी। ईरान के पास अभी भी छोटे हथियार और असममित युद्ध की क्षमता बाकी है।
अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खुला तो क्या होगा?
अगर होर्मुज स्ट्रेट नहीं खुला तो तेल की कीमतें और बढ़ेंगी। ऊर्जा संकट पैदा होगा। गैस की कीमतें यूरोप और अमेरिका में बेतहाशा बढ़ जाएंगी। अमेरिका और ब्रिटेन की मजबूरी भी है कि उन्हें होर्मुज खुलवाना ही होगा। ईरान ने अब इतना गंवा दिया है कि उसके अधिकारी बार-बार कह रहे हैं कि अब वे किसी भी दबाव में नहीं आएंगे। खून का बदला खून से ही लिया जाएगा। होर्मुज पर जंग, आने वाले दिनों में और कठिन होने वाली है।
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