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पहले EU, अब खाड़ी के देश, भारत की नई ट्रेड डील क्या है, असर क्या होगा?

भारत ने गुरुवार को गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के साथ में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लिए नियम एवं शर्तों पर सहमत जता दी।

Gulf free trade agreement

पीयूष गोयल। Photo Credit- PTI

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केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को जानकारी देते हुए कहा कि भारत और छह देशों की गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लिए बातचीत शुरू करने के नियम एवं शर्तों पर सहमत हो गए हैं। भारत ने हाल के समय में यह तीसरी बड़ी ट्रेल डील की है। इससे पहले भारत ने यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ फ्री ट्रेड पैक्ट और अमेरिका के साथ ट्रेड डील पक्की की थी।

 

गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल में UAE और सऊदी अरब के अलावा, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान शामिल हैं। गोयल ने कहा कि प्रस्तावित ट्रेड डील एक मजबूत और व्यापक व्यापार ढांचा प्रदान करेगा, जिससे वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही आसान होगी और दोनों पक्षों के बीच निवेश प्रवाह को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारत और खाड़ी देशों के बीच पहले से ही गहरे आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं और यह समझौता उन्हें नई ऊंचाइयों तक ले जाने में मदद करेगा।

 

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भारत के व्यापारिक संबंधों का विस्तार

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत वैश्विक स्तर पर अपने व्यापारिक संबंधों का तेजी से विस्तार कर रहा है। हाल ही में भारत ने यूरोपीय संघ के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया है और अमेरिका के साथ भी एक अहम व्यापार करार किया है।

 

 

 

डोनाल्ड ट्रंप का दावा

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि GCC के साथ ट्रेड डील से भारत के ऊर्जा स्रोत के विविधता में मदद मिलेगी। यह डील हाल ही में हुई भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को देखते हुए काफी अहम है। अमेरिका के साथ डील के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत रूस के साथ अपने उर्जा संबंधों को खत्म कर देगा। हालांकि, ट्रंप के इस दावे को लेकर भारत सरकार ने कोई बयान जारी नहीं किया है।

 

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बढ़ेगी पाकिस्तान की परेशानी

बता दें कि भारत और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के बीच फ्री ट्रेड डील से द्विपक्षीय व्यापार में बढोतरी होगी और यह समझौता दोनों पक्षों को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने में भी मदद करेगा। भारत के लिए यह समझौता पश्चिम एशिया के साथ आर्थिक जुड़ाव को मजबूत करने और निर्यात बाजारों का विस्तार करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। इसके अलावा इस डील से पाकिस्तान की परेशानी बढ़ेगी।


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