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कहीं बाढ़ तो कहीं भीषण गर्मी, कुदरत के निजाम से कैसे निपटेगा PAK?

आतंकवाद के गढ़ पाकिस्तान में अंदरूनी समस्याएं तमाम हैं। अब कुदरत के कहर ने भी उसे घेरना शुरू कर दिया है। उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती कुदरत के निजाम से निपटने की है।

 Pakistan Climate Change Risk.

प्राकृतिक आपदाओं से कैसे निपटेगा पाकिस्तान। (AI Generated Image)

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27 जून को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की स्वात घाटी में अचानक आई बढ़ में 16 पर्यटक बह गए। इनमें सात की मौत हो चुकी है। बाकी लापता लोगों की तलाश की जा रही है। पाकिस्तान में जुलाई से सितंबर तक मानसून सीजन चलता है। 27 से 28 जून के बीच पाकिस्तान के पंजाब, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बाढ़ से 19 लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले महीने पाकिस्तान में भीषण ओलावृ्ष्टि और तूफान की चपेट में आने से कुल 32 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। 

 

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान और उसके आसपास मौसम की चरम घटनाओं में तेजी से इजाफा होगा। अचानक सूखा, बाढ़, ओलावृ्ष्टि, कभी गर्मी तो कभी ठंडी जैसी घटनाओं से न केवल जन मानस बल्कि खेती पर भी विपरीत असर पड़ेगा। पाकिस्तान के पास अभी कुदरत के इस निजाम से निपटने की खातिर पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।

 

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प्रभावित देशों की सूची में पाकिस्तान टॉप पर

जर्मन वाच के मुताबिक साल 2022 में पाकिस्तान क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स में सबसे टॉप पर रहा है। पाकिस्तान में सबसे अधिक मौसम की चरम घटनाएं देखने को मिली। पाकिस्तान का लगभग एक तिहाई हिस्सा बाढ़ से डूब गया था। 1765 लोगों की जान गई और लगभग 3.30 करोड़ लोगों सीधे तौर पर प्रभावित हुए। लगभग 15.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा। क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स के मुताबिक 1993 से 2022 तक 9400 से अधिक चरम मौसम की घटनाएं दर्ज की गईं। इसमें लगभग 765000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। दुनिया को लगभग 4.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा।

 

आर्थिक संकट, कैसे कुदरत के निजाम से लड़ेगा पाकिस्तान?

2024 में भी पाकिस्तान में बाढ़ से हजारों लोगों प्रभावित हुए और भीषण गर्मी में 600 लोगों की जान गई। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के प्रमुख का मानना है कि पाकिस्तान को साल 2050 तक अगर क्लाइमेट चेंज से लड़ना है तो सलाना 40 से 50 अरब डॉलर का सलाना निवेश करना होगा। मगर पाकिस्तान का खजाना खाली है। उसके सामने चुनौती कर्ज की किश्तों को चुकाने की है।  साल 2023 में पाकिस्तान को 10 बिलियन डॉलर का कर्ज लेना पड़ा। इसके बाद उसे 2.8 बिलियन डॉलर का और कर्ज मिला। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान को 1.3 बिलियन डॉलर का कर्ज दिया। मगर जलवायु परिवर्तन से लड़ने में यह राशि बेहद काम है।

 

चरम मौसम घटनाओं में क्या होता है?

  • चिलचिलाती गर्मी
  • भारी बारिश
  • जंगलों में आग लगना
  • अचानक बाढ़ 
  • सूखा पड़ना
  • विनाशकारी तूफान
  • चक्रवात

 

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जब पाकिस्तान को लगाना पड़ा आपातकाल

भीषण बारिश और बाढ़ के कारण पाकिस्तान में 25 अगस्त 2022 को राष्ट्रीय आपातकाल लगाना पड़ा था। 28 अक्टूबर 2022 में विश्व बैंक ने अनुमान लगाया कि पाकिस्तान को पुनर्निर्माण में लगभग 16 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक खर्चना पड़ेगा। इसी कारण से यह घटना विश्व इतिहास की सबसे महंगी आपदा में से एक बन गई। मार्च 2022 में पाकिस्तान में भीषण गर्मी ने रिकॉर्ड बनाया। यहां के नवाबशाह इलाके में पारा 49.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। 

 

पाकिस्तान में पिघल रहे ग्लेशियर

पाकिस्तान में जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक मानसूनी बारिश में 50 फीसद का इजाफा हुआ है। इससे देशभर में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। इटली के शोध संस्थान EvK2CNR के मुताबिक पाकिस्तान में 13000 से अधिक ग्लेशियर हैं। तेजी से ग्लेशियर पिघलने के कारण बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। एमनेस्टी इंटरनेशल के मुताबिक पाकिस्तान में जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक खतरा बच्चों और वृद्धों को हैं। अचानक प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर अधिक भार डाला है। इससे व्यवस्था पूरी तरह से चरमराने लगी है। 

 

ग्लेशियर पिघलने से क्या खतरा?

  • नदियों में बाढ़ की आशंका
  • बुनियादी ढांचे को नुकसान
  • जान-माल की हानि
  • सूखा और पानी की कमी

भारत भी जलवायु परिवर्तन से अछूता नहीं

क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स के मुताबिक भारत में भी मौसम की चरम घटनाओं में इजाफा हो रहा है। इस वजह से अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। देश में अचानक भारी बारिश, तूफान, बाढ़, चक्रवात, शीत लहर और लू की घटनाओं में वृद्धि हुई है। भारत में पिछले तीन दशकों में 400 से अधिक चरम मौसम की घटनाएं दर्ज की गईं। लगभग 80 हजार लोगों की जान गई और देश को 180 बिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा। 

यह 10 देश सबसे अधिक प्रभावित

2022 में मौसम की चरम घटनाओं से प्रभावित 10 देशों की सूची में सात देश उच्च आय वाले थे। तीन देश निम्न आयु वाले थे। इन्हीं में से एक पाकिस्तान था। उच्च आय वाले देशों की मुकाबला करने की क्षमता निम्न आय वाले देशों की तुलना में काफी है। उनके पास संसाधन और पैसा भी है। क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स के मुताबिक 2022 में सबसे अधिक प्रभावित देशों में पाकिस्तान, बेलीज, इटली, ग्रीस, स्पेन और प्यूर्टो रिको, अमेरिका, नाइजीरिया, पुर्तगाल और बुल्गारिया शामिल हैं। 

 


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