अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग को एक महीना हो चुका है। अभी तक ट्रंप को अपेक्षित नतीजे नहीं मिले हैं। दुनिया ने जितना सोचा था, ईरान उससे कड़ी प्रतिक्रिया दे रहा है। पूरे खाड़ी देशों पर स्थित अमेरिका सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिका को करीब 13 जवानों को खोना पड़ा और 200 से अधिक घायल हैं। ईरान में अमेरिका और इजरायल ने 10 हजार से अधिक स्थानों पर बमबारी की। अब तक 1900 से अधिक की जान गई और करीब 18 हजार नागरिक घायल हैं।
ईरान ने कुवैत, कतर, जॉर्डन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित अमेरिका एयरबेस पर ड्रोन और मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां थाड एयर डिफेंस सिस्टम को नुकसान पहुंचा। कतर स्थित अल उदैद बेस पर भी कई बैटरियों को डैमेज किया। एक रीपर ड्रोन के भी नष्ट होने की सूचना है।
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27 मार्च को सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमले में कई केसी-135 टैंकर विमान को क्षति पहुंची हैं। इन विमानों का इस्तेमाल हवा में फाइटर जेट में ईंधन भरने में किया जाता था। इसके अलावा एक एक ई-3 सेंट्री एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) विमान भी तबाह हुआ है। 15 सैनिक घायल भी हुए हैं। इनमें पांच की हालत नाजुक है।
13 मार्च को भी सऊदी अरब स्थित इसी अमेरिकी बेस पर हमला हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उस हमले में भी पांच केसी-135 विमानों को भारी नुकसान पहुंचा था। ई-3 सेंट्री (AWACS) विमान पर हमले को अमेरिका के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। यह विमान अमेरिकी सेना को सैकड़ों किमी दूर स्थित फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइल की जानकारी उपलब्ध कराता था।
एक महीने की जंग में अमेरिका को 12 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन का नुकसान उठाना पड़ा है। 19 मार्च को ईरान के आईआरजीसी ने अमेरिकी एफ-35 को निशाना बनाने का दावा किया। मगर अमेरिका ने इस दावों की पुष्टि नहीं की। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि एक एफ-35 विमान ने आपात लैंडिंग की थी।
28 फरवरी को हमले के एक दिन बाद अमेरिका को सबसे बड़ा झटका कुवैत में लगा। तीन अमेरिका एफ-15ई स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान क्रैश हो गए। ईरान ने इन विमानों को निशाना बनाने का दावा किया। बाद में जानकारी मिली की कुवैत के विमानों ने गलती से इन विमानों पर हमला कर दिया था।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस पर थाड एयर डिफेंस सिस्टम और उपग्रह संचार प्रणाली पर हमला किया। बहरीन में नेवी बेस और इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर बड़ा नुकसान हुआ। सऊदी अरब में सीआईए के अड्डे को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना ईरान पर अब तक 850 से अधिक टॉमहॉक मिसाइलें दाग चुकी है। इस कारण उसका भंडार भी तेजी से घट रहा है।