अमेरिकी सेना के सामने मिसाइलों का संकट खड़ा होने वाला है। एक महीने की जंग में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 850 से अधिक टॉमहॉक मिसाइलें दागीं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका टॉमहॉक मिसाइलों की कमी से जूझ रहा है। अगर इनकी भरपाई जल्द नहीं हुई तो अमेरिकी सेना के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
1998 में 'इनफिनाइट रीच' ऑपरेशन में अमेरिका ने 79 मिसाइलें दागीं। अफगानिस्तान में 'इनड्यूरिंग फ्रीडम' ऑपेरशन में 90 टॉमहॉक मिसाइलों को दागा गया है। 2024-25 में अमेरिकी सेना ने 'पोसिडॉन ऑर्चर' ऑपरेशन में हूती विद्रोहियों पर 135 टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल किया। 2003 में इराक युद्ध में सबसे अधिक 802 मिसाइलों से हमला किया गया था। अमेरिकी इतिहास में सबसे अधिक टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल सिर्फ 30 दिन की जंग में ईरान के खिलाफ किया गया। अभी तक कुल 850 टॉमहॉक मिसाइलें दागीं जा चुकी हैं।
उत्पादन कम, खपत ज्यादा
अमेरिका अभी हर साल करीब 100 टॉमहॉक मिसाइलों का उत्पादन करता है। अगर उत्पादन को बढ़ाया जाए तो सालाना करीब 600 मिसाइलों का ही उत्पादन हो सकता है। अमेरिका की योजना है कि 2026 के बाद टॉमहॉक मिसाइलों का उत्पादन 1000 सालाना तक ले जाना है। युद्ध की स्थिति में टॉमहॉक मिसाइलों का अधिक इस्तेमाल होने से स्टॉक जल्द खत्म होने का खतरा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी 3000 मिसाइलों का ही स्टॉक बचा है।
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टॉमहॉक लंबी दूरी तक मार करने वाली क्रूज मिसाइल है। पहले खाड़ी युद्ध के बाद से ही अमेरिका इसका खूब इस्तेमाल करता है। एक मिसाइल की कीमत करीब 30 करोड़ रुपये है। इस वर्ष अमेरिकी नौसेना को करीब 110 टॉमहॉक मिसाइलें मिलनी हैं।
अमेरिका में रक्षा विश्लेषकों को चिंता है कि अगर ईरान के खिलाफ और टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल और किया गया तो इनका भंडार जल्द खत्म हो सकता है। इसे भरने में वर्षों लगेंगे। ऐसी स्थिति में अगर पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बनती है तो अमेरिका के सामने एक बड़ा जोखिम खड़ा होगा।
टॉमहॉक मिसाइलों के बारे में जानें
अमेरिका की टॉमहॉक सबसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसे जमीन पर स्थित लक्ष्यों को तबाह करने की खातिर विकसित किया गया है। यह सभी मौसम में किसी भी देश के अंदर सैकड़ों किमी तक तबाही मचाने की क्षमता रखती है। मिसाइल को नौसैनिक जहाजों से लॉन्च किया जाता है। अमेरिका साल 1980 से इन मिसाइलों को बना रहा है।
पिछले साल ईरान के परमाणु प्लांटों पर भी टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था। यह मिसाइल युद्ध में अजमाया हुआ है। अगर भविष्य में चीन के खिलाफ कोई जंग शुरू होती है तो टॉमहॉक मिसाइलों की भूमिका सबसे अहम होगी। यही कारण है कि इनके भंडार को लेकर अमेरिका में चिंता है।
अमेरिका ने टाइफॉन लॉन्चर विकसित किया है। इसकी मदद से टॉमहॉक मिसाइल को जमीन से भी दागा जा सकता है। 2024 से यह सिस्टम फिलीपींस में तैनात है। मगर इन मिसाइलों को फाइटर जेट से लॉन्च नहीं किया जा सकता है।
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अमेरिका अपने दुश्मनों के खिलाफ समुद्र से इन मिसाइलों को लॉन्च करता है। मिसाइल जमीन के एकदम करीब से गुजरती है। इस कारण वजह रडार को मात देने में सक्षम है। मिसाइल का रास्ता पहले से ही निर्धारित होता है। सटीक जीपीएस मैप के तहत टारगेट पर घातक हमला करती है। अमेरिकी नौसना अक्सर एयरबेस, सैन्य ठिकाने, अहम इमारतों, कमांड सेंटर, रडार और मिसाइल सिस्टम को टॉमहॉक मिसाइलों से तबाह करती है।