पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की सीमा पर कई जगह हवाई हमले किए हैं। शनिवार रात से लेकर रविवार सुबह तक ये हमले लगातार जारी हैं। पाकिस्तान का कहना है कि उसकी सेना ने खुफिया जानकारी के आधार पर सटीक ऑपरेशन किए, जिसमें पाकिस्तानी तालिबान (TTP) के 7 कैंप और उनके सहयोगी गुटों के ठिकानों को निशाना बनाया गया।
पाकिस्तान ने इस्लामिक स्टेट के एक सहयोगी गुट को भी टारगेट किया गया। यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि हाल में पाकिस्तान में कई बड़े हमले हुए हैं। इसमें इस्लामाबाद की एक शिया मस्जिद में सुसाइड बॉम्बिंग हुई, जिसमें 31 लोग मारे गए। इसके अलावा खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर और बन्नू जिलों में भी सुसाइड अटैक हुए, जिनमें कई सैनिक और एक बच्चा शहीद हो गया।
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अफगानिस्तान पर भड़का क्यों पाकिस्तान?
पाकिस्तान का आरोप है कि ये हमले अफगानिस्तान में बैठे TTP के लीडरों और उनके हैंडलर्स के इशारे पर हुए। हमलावरों में एक अफगान नागरिक भी था। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से कई बार कहा है कि वह अपनी जमीन से पाकिस्तान के खिलाफ हमले रोकने के लिए कदम उठाए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
और हमले करेगा पाकिस्तान
पाकिस्तान ने कहा कि वो क्षेत्र में शांति चाहता है, लेकिन अपने नागरिकों की सुरक्षा सबसे पहले है। इसलिए अब वो कोई संयम नहीं बरतेगा और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी, चाहे वे कहीं भी हों।
किन इलाकों को निशाना बना रहा है अफगानिस्तान?
अफगान मीडिया का कहना है कि हमले अफगानिस्तान के अंदर पकतिका और नंगरहार प्रांतों में हुए हैं। पाकिस्तान ने मदरसों और आम नागरिकों को निशाना बनाया है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच रिश्ते पहले से तनावपूर्ण हैं। अक्टूबर में हुए सीमाई विवाद के बाद रिश्ते और तल्ख हो गए हैं।
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क्यों बार-बार टकरा रहे हैं पाकिस्तान और अफगानिस्तान? वजहें समझिए-
पश्तूनी राष्ट्रवाद, पाकिस्तान के लिए नासूर है
पाकिस्तान और अफगानिस्तान, डूरंड रेखा को लेकर उलझते रहे हैं। साल 1893 में अंग्रेजों ने यह तय किया कि डूरंड रेखा के लि खींची गई यह सीमा रेखा अफगानिस्तान और पाकिस्तान को विभाजित करेगी। अफगानी इस रेखा को नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि पश्तूनों को बांट दिया गया है। पाकिस्तान ने इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा माना है, जिसे लेकर अफगानिस्तान अक्सर हिंसक झड़प करता है।
TTP के हमले और पाकिस्तान का पलटवार
पाकिस्तान, आंतकवाद से जूझ रहा है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने इस्लामिक देश की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। TTP, अफगानिस्तान में रहकर पाकिस्तान को तबाह करता है। अफगानी सरकार का कहना है कि उनकी जमीन किसी के खिलाफ नहीं इस्तेमाल होती है। TTP अक्सर, पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देती है, जिसका पाकिस्तान विरोध करता है। TTP की कार्रवाई में पाकिस्तान के सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं।
दोस्ती की उम्मीद थी, तालिबान ने दुश्मनी चुनी
तालिबान सरकार के रुख से पाकिस्तान की उम्मीदें टूटी हैं। पाकिस्तान को लग रहा था कि कट्टरपंथी सरकार के साथ तालमेल बेहतर होगा लेकिन तालिबान सरकार का झुकाव भारत की ओर है। सत्ता संभालने के बाद तालिबान ने अपनी प्राथमिकताएं तय की। तालिबान, अफगानी राष्ट्रवाद में भरोसा रखता है। तालिबान, बार-बार डूरंड रेखा और पश्तून के मुद्दे उठा रहा है।
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अफगानिस्तानियों को पाकिस्तान भेज रहा उनके देश
तालिबानी शासन में, अफगानिस्तान से बड़ी संख्या में पलायन हुआ है। अफगानिस्तान की तुलना में, पाकिस्तान कहीं ज्यादा लोकतांत्रिक और महिला अधिकारों का हिमायती देश है। पाकिस्तान में महिलाओं को सत्ता में हिस्सेदारी मिलती है, कई बड़े पदों पर महिलाओं का दबदबा है। अब पाकिस्तान ने अफगानों को वापस भेजने के फैसला लिया है। अब इसकी वजह से नया संकट पैदा हो रहा है।
व्यापार को लेकर अफगानिस्तान बढ़ता दबाव भी जिम्मेदार है
अफगानिस्तान एक लैंडलॉक देश है। व्यापार के लिए पाकिस्तान पर पूरी तरह से निर्भर है। पाकिस्तान अक्सर दबाव बनाने के लिए सीमा व्यापार तोरखम और चमन बंद कर देता है। TTP इसे लेकर भड़क जाता है और हमले करता है।