logo

ट्रेंडिंग:

3 राज्यों तक क्यों फैली है केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की सीमा? इतिहास से समझिए

पुडुचेरी का नक्शा अगर आप देखें तो पाएंगे कि यह छोटा सा केंद्र शासित प्रदेश तीन-तीन राज्यों में फैला हुआ है और उन राज्यों के क्षेत्रों से घिरा हुआ है।

puducherry yanam city

पुडुचेरी, Photo Credit: Official Website

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement
Group2

चुनावी साल में केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भी सरकार चुनी जानी है। साल 1962 में बने पुडुचेरी का नाम पहले पॉन्डिचेरी था लेकिन 1 अक्तूबर 2006 को इसका नाम बदलकर पुडुचेरी कर दिया गया। केंद्र शासित प्रदेशों के क्षेत्रफल को देखा जाए तो सिर्फ लक्षद्वीप और चंडीगढ़ से बड़ा दिखने वाला पुडुचेरी असल में किसी एक क्षेत्र विशेष में सीमित नहीं है। यह छोटा सा केंद्र शासित प्रदेश असल में तीन-तीन राज्यों में फैला हुआ है और ये इलाके आपस में सटे भी नहीं हैं। आइए इसी का कारण समझते हैं।

 

पुडुचेरी के नक्शे को देखें तो इसके तीन हिस्से तीन अलग-अलग राज्य में दिखेंगे। पुडुचेरी और करईकाल तमिलनाडु राज्य के बीच में हैं। यानम शहर आंध्र प्रदेश के बीच में है और माहे शहर केरल में स्थित है। इन सबको मिलाकर ही पुडुचेरी बनता है। मुख्य रूप से फ्रांसीसी सरकार के अधीन रहा पुडुचेरी 1 नवंबर 1954 को आजाद हुआ और इसका भारत में विलय हुआ। साल 1962 में हुए 12वें संविधान संशोधन के जरिए कानूनी रूप से इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। साल 1963 में पुडुचेरी पूरी तरह से भारत का हिस्सा बना क्योंकि 1954 में पुडुचेरी को कानूनी मान्यता नहीं मिली थी।

क्या है पुडुचेरी का इतिहास?

 

दरअसल, पुडुचेरी के जो भी इलाके हैं वे लंबे समय तक फ्रांस की कॉलोनी थे। ठीक वैसे ही जैसे भारत का बाकी हिस्सा ब्रिटिश शासन के अधीन था, वैसे ही पुडुचेरी के इलाके फ्रेंच सरकार के अधीन थे। फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनी पहली फैक्ट्री गुजरात के सूरत और दूसरी पुडुचेरी में ही बनाई थी। पुडुचेरी में 1674 में फैक्ट्री बनाई गई थी। इसी तरह माहे में 1725, यानम में 1731 और कराईकाल में 1739 में फेंच कंपनियों की स्थापना हुई। पश्चिम बंगाल के चंग्रनगर में फैक्ट्री बनाई गई थी।

 

यह भी पढ़ें: मतभेद और बगावत से जन्मी नई पार्टी, क्या है पुडुचेरी के CM रंगासामी की कहानी?

 

1769 में फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी भंग हो गई तो ये ठिकाने सीधे फ्रेंच सरकार के अधीन हो गए। 1778 में ब्रिटिश सरकार ने इन पर कब्जा कर लिया था लेकिन 1816 में इन्हें फिर से फ्रांस को लौटा दिया गया। फ्रांस ने ही यहां स्थानीय सरकारें शुरू कीं। 

अलग-अलग क्यों हैं पुडुचेरी के इलाके?

 

पहली अहम बात है कि इन इलाकों में फ्रेंच संस्कृति विकसित हो गई थी। साल 1962 में जब इसे भारत में शामिल किया गया तभी यह शर्त रखी गई थी कि इसकी सांस्कृतिक धरोहर को बचाए रखा जाएगा। अब अगर इसके अलग इलाकों को अलग राज्यों में मिला जाए तो यह आशंका है कि इन इलाकों पर उस राज्य की छाप दिखने लगे। इसकी संस्कृति को बचाए रखने का असर है कि पुडुचेरी के इलाकों में आज भी फ्रांस का असर दिखता है।

 

यह भी पढ़ें: बीजेपी की केरल में दूसरी लिस्ट जारी, हैवीवेट्स नेताओं पर लगाया दांव

 

यहां की इमारतों, खान-पान और रहन-सहन में भी फ्रेंच संस्कृति का असर दिखता है। केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से घिरे होने के बावजूद पुडुचेरी के लोग तमिल, मलयाली या तेलुगु संस्कृति का असर नहीं दिखता है।

 


और पढ़ें