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महज 24 महीनों में सत्ता के करीब TVK, विजय ने दोहराया NTR का 43 साल पुराना इतिहास

तमिलनाडु चुनाव के रुझानों में विजय की पार्टी TVK बहुमत की ओर बढ़ रही है। 2 साल के अंदर मिली इस सफलता के बाद विजय ने NTR का 43 साल पुराना इतिहास दोहराया है।

Vijay TVK party repeat NTR 43 year old history

टीवीके पार्टी प्रमुख विजय, Photo Credit: ANI

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तमिलनाडु की राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सुपरस्टार विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) अपने पहले ही चुनाव में शानदार प्रदर्शन करती नजर आ रही है। शुरुआती रुझानों में पार्टी राज्य के पारंपरिक दिग्गज दलों DMK और AIADMK को कड़ी टक्कर देती हुई बहुमत के करीब पहुंच गई है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि राज्य की सियासत में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है। ऐसा करके TVK ने एनटी रामाराव (NTR) द्वारा 43 साल पहले हासिल की गई एक ऐतिहासिक उपलब्धि को दोहराया है।

 

तमिलनाडु में 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव के लिए मतगणना सोमवार को हुई। जिसमें विजय की TVK अपने द्रविड़ प्रतिद्वंद्वियों DMK और AIADMK से आगे निकलती दिख रही है। 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए पार्टी को 118 विधायकों की जरूरत है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार, TVK अब तक 68 सीटें जीत चुकी है और 38 अन्य सीटों पर आगे चल रही है।

 

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विजय ने दोहराया NTR का 43 साल पुराना इतिहास

विजय की इस तेजी से मिली सफलता ने आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री NTR की याद ताजा कर दी है। NTR ने 1983 में अपनी पार्टी बनाने के कुछ ही महीनों में सत्ता हासिल कर इतिहास रचा था। अब विजय भी लगभग उसी राह पर चलते दिख रहे हैं, जिन्होंने महज 2 साल में राजनीति में मजबूत पकड़ बना ली है।

 

तमिलनाडु के दिग्गज नेता एमजी रामचंद्रन (MGR) ने 1972 में AIADMK की स्थापना की थी लेकिन उन्हें सत्ता में आने में करीब पांच साल का समय लगा। इसके मुकाबले विजय ने सिर्फ दो साल में ही विधानसभा की 234 सीटों में बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचकर नया रिकॉर्ड कायम करने के संकेत दिए हैं। सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है और TVK इस लक्ष्य के बेहद करीब नजर आ रही है।

 

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हर स्टार को नहीं मिलती सियासी सफलता

दक्षिण भारत में कई फिल्मी सितारों ने राजनीति में कदम रखा लेकिन सभी को सफलता नहीं मिली। चिरंजीवी ने अपनी पार्टी बनाकर बाद में कांग्रेस में विलय कर दिया, जबकि पवन कल्याण को भी शुरुआती दौर में संघर्ष करना पड़ा। कमल हासन की पार्टी को भी चुनावी जीत नहीं मिल सकी। वहीं विजयकांत ने शुरुआत में सफलता पाई लेकिन बाद में उनकी पार्टी कमजोर पड़ गई।

 

फिलहाल, राज्य की जनता ने जिस तरह विजय को समर्थन दिया है, उससे यह साफ है कि फिल्मी लोकप्रियता को उन्होंने राजनीतिक ताकत में बदलने में सफलता हासिल की है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या विजय मुख्यमंत्री पद तक पहुंचकर एक नया इतिहास रच पाएंगे।


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