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85 सीटों में से 90% पर TMC का कब्जा, बंगाल में कितना अहम है 'मुस्लिम' फैक्टर?

पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी काफी अहम है। राज्य के कुछ जिलों में तो 50 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम आबादी है और 85 सीटों पर निर्णायक भूमिका में हैं। इन में से 90 प्रतिशत सीटों पर 2021 में टीएमसी को जीत मिली थी।

muslim voters in west bengal

मुस्लिम समुदाय के साथ सीएम ममता बनर्जी, Photo Credit: ANI

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर मुस्लिम मतदाता चर्चा में हैं। मुस्लिम मतदाता किस और जाएंगे, किस पार्टी को समर्थन करेंगे यह सवाल हर एक पार्टी के मन में है। कुछ नई पार्टियां मुस्लिमों के वोट लेने की कोशिश कर रही हैं तो कांग्रेस और टीएमसी जैसी पार्टियों की नजर भी मुस्लिम मतदाताओं पर ही हैं। तेलंगाना के बाद बिहार और महाराष्ट्र में विपक्ष को परेशान कर चुके असदुद्दीन ओवैसी की अब बंगाल में एंट्री हो चुकी है। उनकी पार्टी AIMIM ने टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया है। ऐसे में अब मुस्लिम मतदाताओं को लेकर लड़ाई और ज्यादा तेज हो गई है। 

 

मुस्लिम मतदाता पश्चिम बंगाल में काफी अहम हैं। इसके पीछे सीधा सा कारण मुस्लिमों की आबादी है। पश्चिम बंगाल में कई ऐसे जिले हैं जिनमें मुस्लिमों की आबादी अन्य धार्मिक समुदायों से ज्यादा है। कई सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। यानी जिस तरफ मुस्लिम मतदाताओं का रुख होगा उस उम्मीदवार की जीत तय है। ऐसे में इन सीटों पर मुस्लिमों को लुभाने की कोशिश में तमाम दल लग गए हैं। 

 

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कितना अहम है 'M' फैक्टर?

पश्चिम बंगाल में मुस्लिम फैक्टर कितना अहम है इसका जवाब जनसंख्या के आंकड़ों में छिपा है। पश्चिम बंगाल की कुल आबादी में 30 प्रतिशत मुस्लमानों की हिस्सेदारी मानी जाती है। साल 2011 में हुई जनगणना के अनुसार, बंगाल की कुल आबादी करीब 9.13 करोड़ है, जिसमें मुस्लिम आबादी 2.5 करोड़ के करीब है। इसके बाद 2021 में जनगणना होनी थी लेकिन अभी तक नहीं हुई है इसलिए स्टीक आंकडे़ नहीं हैं लेकिन चुनावी विश्लेषकों के अनुसार, 2026 तक बंगाल में मुस्लिम आबादी बढ़कर 28 से 30 प्रतिशत के बीच पहुंच गई है। बंगाल की अब आबादी 10.5 करोड़ से ज्यादा है, जिसमें मुस्लिम जनसंख्या 3 करोड़ से ज्यादा हो सकती है। 

इन जिलों में बहुसंख्यक हैं मुस्लिम

पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों में तो मुस्लिमों की आबादी अन्य धर्मों से ज्यादा है। कई पत्रकार इस रीजन का 'मामु' भी कहते हैं। मामु, मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों को कहा जाता है। इन इलाकों पर कभी कांग्रेस की मजबूत पकड़ होती थी लेकिन 2011 के बाद इन जिलों में टीएमसी ने अपना कब्जा जमा लिया है। 

  • मुर्शिदाबाद- 66.3 प्रतिशत मुस्लिम आबादी
  • मालदा- 51.3 प्रतिशत मुस्लिम आबादी
  • उत्तर दिनाजपुर - 50 प्रतिशत मुस्लिम आबादी 
  • बीरभूम- 37 प्रतिशत मुस्लिम आबादी
  • दक्षिण 24 परगना- 35.5 प्रतिशत मुस्लिम आबादी
  • नादिया - 26.7 प्रतिशत मुस्लिम आबादी

कितनी सीटों पर दबदबा?

मुस्लिम आबादी का दबदबा मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, बीरभूम, दक्षिण 24 परगना और नदिया जैसे जिलों में काफी ज्यादा है। इन जिलों की करीब 85 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक होते हैं। कुल 294 में से 100 से 110 सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का असर माना जाता है। मुस्लिम मतदाताओं का साथ मिलने के कारण ही टीएमसी ने 2021 के चुनावों में धमाकेदार जीत दर्ज की थी।

 

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मुस्लिम बहुल सीटों की राजनीति

2011 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम बहुल सीटों पर कांग्रेस और लेफ्ट का दबदबा रहा था। इन जिलों में 2011में कांग्रेस ने 27 और लेफ्ट ने 19 सीटें जीती थीं। वहीं, टीएमसी को 36 सीटों पर जीत मिली थी। हालांकि, इन में से 26 सीटें सिर्फ साउथ 24 परगना जिले से थी और मुर्शिदाबाद में तो टीएमसी खाता भी नहीं खोल पाई थी। 

 

2016 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी को मुस्लिमों का साथ मिला और इन जिलों में 85 में से 46 सीटों पर पार्टी को जीत मिली। इसके साथ ही कांग्रेस को 27 सीटें मिलीं लेकिन लेफ्ट को 11 सीटों पर जीत मिली। बीजेपी का अब तक इन जिलों में खाता तक नहीं खुला था। 

 

2021 के विधानसभा चुनावों में इन जिलों में टीएमसी ने एकतरफा जीत दर्ज की। इन जिलों की 85 में से 75 सीटों पर टीएमसी ने जीत दर्ज की। कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला और लेफ्ट को 85 में से सिर्फ 1 सीट पर जीत मिली। वहीं, पहली बार इन जिलों में भारतीय जनता पार्टी का खाता खुला और 85 में से 9 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली।

 

अब 2026 में इन जिलों की जंग इसलिए भी अहम हो गई है क्योंकि हुमायूं कबीर ने असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) से गठबंधन कर लिया है। ऐसे में मुस्लिम मतदाता इस गठबंधन की ओर भी जा सकेत हैं, जो ममता बनर्जी और कांग्रेस को परेशान कर सकता है। 


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