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पश्चिम बंगाल में वोटिंग से पहले आ गई सप्लीमेंट्री लिस्ट, यूं चेक करें अपना नाम

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के पहले चरण के मतदान से पहले एक सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी कर दी है। 

voter list west bengal

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: PTI

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पश्चिम बंगाल में पहले चरण के विधानसभा चुनाव का मतदान गुरुवार को होना है। 152 सीटों पर वोटिंग से ठीक पहले चुनाव आयोग ने एक सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी की है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जारी की गई इस लिस्ट में उन लोगों के नाम शामिल कर लिए गए हैं जिनको ट्राइब्युनल से हरी झंडी मिल गई है और वे वोट डालने के योग्य माने गए हैं। चुनाव आयोग की तरफ से यह तो नहीं बताया गया है कि कुल कितने वोटरों के नाम इस लिस्ट में शामिल हैं लेकिन ट्राइब्युनल में लड़ाई लड़ रहे कुछ लोगों के लिए यह अच्छी खबर है। ऐसे लोग चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर अपना नाम वोटर लिस्ट में चेक कर सकते हैं।

 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जिन लोगों के नाम ट्राइब्युनल में पास हो जाते हैं, उन्हें वोटर देने का मौका दिया जाए। अब चुनाव आयोग ने ऐसे ही लोगों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। चुनाव आयोग ने यह भी नहीं बताया है कि कुल कितने लोगों ने ट्राइब्युनल में आवेदन किया था और उसमें से कितने लोगों के नामों को मंजूरी मिली है। 

 

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कैसे चेक करें अपना नाम?

 

चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर आप अपनी विधानसभा और बूथ नंबर के हिसाब से अपना नाम लिस्ट में देख सकते हैं। अभी जिन बूथों को लेकर फैसला नहीं हुआ है, उनकी लिस्ट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जिन लोगों के नाम पेंडिंग में नहीं हैं लेकिन अपने EPIC या वोटर आईडी नंबर से अपना नाम लिस्ट में चेक कर सकते हैं।

 

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि वोटिंग से दो दिन पहले तक जो मतदाता वोटिंग के योग्य पाए जाएं, उन्हें वोट डालने दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि पश्चिम बंगाल की 152 विधानसभा सीटों पर मतदान से पहले 21 अप्रैल को वोटर लिस्ट जारी की जाए। इसी आदेश के मुताबिक, चुनाव आयोग ने लिस्ट जारी कर दी है। बुधवार शाम तक एक और लिस्ट जारी की जा सकती है।

 

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बता दें कि 6 अप्रैल तक 27 लाख से ज्यादा मतदाता ऐसे थे जिनका केस ट्राइब्यूनल में चल रहा था। इसी को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने मांग की थी कि कम से कम इन लोगों को वोट डालने का अधिकार दिया जाए। 


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