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जिन्हें NDA-महागठबंधन ने नहीं दिया भाव, उनके लिए सहारा बनी जन सुराज

जिन नेताओं को बड़ी पार्टियों में जगह नहीं मिल रही है, वे जन सुराज पार्टी का रुख कर रहे हैं। प्रशांत किशोर का यह प्रयोग क्यों लोगों का रास आ रहा है, आइए जानते हैं।

Prashant Kishor Jan Suaraj

जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (Photo Credit: Jan Suraj)

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संजय सिंह, पटना: प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज बिहार में एक नया प्रयोग करने का प्रयास कर रही है। चुनाव में वोटर इसे कितना स्वीकार करेगा, यह परिणाम बताएगा। एक पार्टी के तौर पर उम्मीदवारों के लिए एक मजबूत विकल्प जन सुराज बन गया है। प्रमुख पार्टियों से निराश कार्यकर्ताओं के लिए आशा की किरण जन सुराज बन गया है।

जन सुराज की ओर से जारी उम्मीदवारों की सूची में कम से कम 9 ऐसे नाम हैं, जो पूर्व सांसद, विधायक या विधान पार्षद रह चुके हैं। यह संख्या और बढ़ सकती है। जन सुराज के उम्मीदवारों में दो पूर्व सांसद, चार विधायक और 3 एमएलसी शामिल हैं।

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प्रत्याशियों को लुभा रही जन सुराज 

  • जन सुराज ने जोकीहाट से जनसुराज के उम्मीदवार सरफराज आलम, पूर्व सांसद और विधायक को उम्मीदवार बनाया है। वहीं झारखंड के चतरा से सांसद रहे धीरेंद्र अग्रवाल, गया शहर से जनसुराज के उम्मीदवार हैं।

  • पातेपुर से जनसुराज के उम्मीदवार दसई चौधरी, पूर्व विधायक और मंत्री रह चुके हैं। 

  • सहरसा से जन सुराज के उम्मीदवार किशोर कुमार मुन्‍ना, पूर्व विधायक, नरपतगंज से जर्नादन यादव, पूर्व विधायक, उजियारपुर से दुर्गा प्रसाद सिंह, पूर्व विधायक रह चुके हैं।

  • कुर्था से जनसुराज के उम्मीदवार डॉ रामबली सिंह, पूर्व एमएलसी, गुरुआ से संजीव श्‍याम सिंह, पूर्व एमएलसी और बख्तियारपुर से वाल्मीकि सिंह, पूर्व एमएलसी रह चुके हैं। ये प्रत्याशी इस बार चुनाव मैदान में महागठबंधन और एनडीए प्रत्याशी को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। 

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हर सीट पर अकेले चुनाव लड़ रही है जन सुराज 

बिहार में जनसुराज अकेली पार्टी है, जो लगभग सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है। किसी पार्टी के लिए हर सीट पर उम्मीदवार मिलना ही सबसे बड़ी बात है। कम से कम एक मोर्चे पर तो जनसुराज ने बड़ी सफलता हासिल की है। चुनाव में जन सुराज को वोटर कितना तवज्जो देगा, यह चुनाव परिणाम ही बताएगा।


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