बंगाल में BJP को मिल गया 'CM योगी' जैसा चेहरा? उत्पल महाराज पर खेला बड़ा दांव
भारत सेवाश्रम संघ ने अब स्वामी ज्योतिर्मयानंद उर्फ उत्पल महाराज को मठ से निष्कासित कर दिया है।

स्वामी ज्योतिर्मयानंद उर्फ उत्पल महाराज। Photo Credit: Utpal Maharaj/X
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अभिनेताओं के लेकर संतों तक, खूब टिकट बांटे है। यह चुनाव, बीजेपी के लिए अस्तित्व की लड़ाई है। साल 2016 से लेकर 2021 तक के चुनाव में हर बार, बीजेपी ने पूरी जोर आजमाइश की लेकन असफला ही हाथ लगी, अब एक बार फिर बीजेपी ने बड़ा दांव चला है और स्थानीय चेहरों पर जोर दिया है।
बीजेपी ने विधानसभा चुनाव के लिए उत्तर दिनाजपुर जिले की कालियागंज सीट से भारत सेवाश्रम संघ के स्वामी ज्योतिर्मयानंद उर्फ उत्पल महाराज को उम्मीदवार बनाया है। भारत सेवाश्रम संघ ने इसे राजनीति का जाल बताया और शुक्रवार को एक आंतरिक चिट्ठी जारी कर उन्हें बाहर कर दिया।
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सियासत किया तो संघ से ही बाहर हो गए
भारत सेवाश्रम संघ का कहना है कि यह संस्था, पूरी तरह गैर-राजनीतिक, सामाजिक सेवा और धार्मिक संगठन है। संघ से जुड़ा कोई सन्यासी या आश्रमवासी राजनीति में नहीं जा सकता। उत्पल महाराज, इस संगठन के सबसे प्रमुख चेहरा रहे हैं, अब उन्हें चुनाव लड़ने की वजह से निष्कासन झेलना पड़ा है।
उत्पल महाराज ने कहा कि उन्होंने पहले ही संघ को अपनी चुनाव लड़ने की इच्छा बताई थी, लेकिन मंजूरी नहीं मिली। 17 मार्च को उन्होंने इस्तीफा दे दिया, जो स्वीकार कर लिया गया। अब उन्होंने संन्यास धर्म छोड़कर, सियासत में उतरने का फैसला किया है।
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कौन हैं उत्पल महाराज?
उत्पल महाराज, पश्चिम बंगाल के चर्चित नाम हैं। उनका जन्म दक्षिण दिनाजपुर के बलुरघाट में हुआ था। साल 2000 में वह सेवाश्रम संघ से जुड़े थे। साल 2004 में उन्होंने इतिहास में बीए किया था। वह बचपन से ही आश्रम में रहकर सन्यासी बनना चाहते थे। अब उसी संन्यास के सहारे सत्ता में पहुंचने का सपना देख रहे हैं।
उत्पल महाराज की राजनीति क्या है?
उत्पल महाराज की राजनीति, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलती जुलती है। उनका कहना है कि हिंदुओं की समस्याओं का निदान, केवल किसी आध्यात्मिक संगठन के सहारे नहीं हो रहा है। उत्पल महाराज, हिंदुओं अस्मिता की बात करते हैं। पश्चिम बंगाल की राजनीति पर वह आरोप लगाते रहे हैं कि हिंदुओं को हाशिए पर रखा गया है। उनका कहना है कि रथ यात्रा और राम नवमी पर पुलिस की मदद लेनी पड़ती है। उनका कहना है कि यही वजह है कि वह राजनीति में कदम रख रहे हैं। उनका कहना है कि सेवाश्रम संघ, उनके दिल और दिमाग मे रहेगा। वह संन्यासी जीवन ही जीते रहेंगे।
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BJP ने टिकट क्यों दिया?
उत्पल महाराज को बीजेपी ने कालियागंज सीट से उतारा है। उनके नाम पर पर कोई चौंका। वजह यह है कि वह भारत सेवाश्रम संघ से जुड़े हैं। पंरपरा के अनुसार, उनका नाम स्वामी ज्योतिर्मयानंद रखा गया है। अब वह इस संघ से ही बाहर निकाल दिए गए हैं। वह हिंदूवादी बातें करते हैं, हिंदू एकीकरण पर जोर देते हैं। उनकी राजनीति, बीजेपी की राजनीति पर फिट बैठती है।
सेवाश्रम संघ ने बाहर क्यों निकाला?
सेवाश्रम संघ के महासचिव स्वामी विश्वात्मानंद ने चिट्ठी में लिखा कि उत्पल महाराज राजनीति के जाल में फंस गए हैं। संगठन पूरी तरह गैर-राजनीतिक है, इसलिए सन्यासी राजनीति नहीं कर सकते। आपातकालीन बैठक के बाद उन्हें निकाल दिया गया। संगठन का कहना है कि राजनीति में जाने से सन्यासी जीवन बर्बाद हो जाता है और सांसारिक सुखों में डूब जाते हैं।
उत्पल महाराज ने निष्कासन पर क्या कहा?
उत्पल महाराज ने कहा कि उन्होंने संघ को पहले ही सूचना दी थी। सेवाश्रम संघ ने मंजूरी नहीं दी, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया। उनका कहना है कि हिंदुओं की सेवा करना चाहते हैं। गैर हिंदू राजनीति की वजह से हिंदू खतरे में हैं।
उत्पल महाराज का कहना है कि मुस्लिम तुष्टीकरण की वजह से आम हिंदुओं को परेशानी हो रही है। पूजा तक नहीं करने दिए जा रहा है। वह हिंदू हितों की बात उठाएंगे। अगर आध्यात्मिक संगठन में ही रहे तो ऐसी मुश्किलें नहीं सुलझेंगी। राजनीति ही मकसद पूरा कर सकती है।
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भारत सेवाश्रम संघ है क्या?
भारत सेवाश्रम संघ, एक आध्यात्मिक संगठन है। इसकी स्थापना, स्वामी प्रणवानंद ने साल 1917 में की थी। इसका मुख्यालय कोलकाता में ही है। यह संगठन, प्राकृतिक आपदा में लोगों की मदद करता है, स्कूल, अस्पताल, कुष्ठ रोग केंद्र और आदिवासी कल्याण केंद्रों को चलाता है।
भारत सेवाश्रम संघ, सेवा को ईश्वर की आराधना मानता है। यह युवाओं को व्यायाम और मानसिक शांति से जुड़ने की सलाह देता है। संगठन का कहना है कि संन्यासियों को राजनीति में नहीं जाना चाहिए।
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