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हिंडनबर्ग मामले में सेबी की पूर्व प्रमुख माधवी बुच को मिली क्लीन चिट

लोकपाल ने कहा कि आरोपों को सिद्ध करने के लिए ऐसी जानकारी नहीं दी गई थी जिन्हें वेरिफाई किया जा सके।

madhabi puri buch । Photo Credit: PTI

माधबी बुच । Photo Credit: PTI

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लोकपाल ने बुधवार को पूर्व सेबी (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) प्रमुख माधवी पुरी बुच को हिंडनबर्ग रिपोर्ट के आधार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से क्लीन चिट दे दी। लोकपाल ने कहा कि ये आरोप 'निराधार, हल्के किस्म' के हैं। भ्रष्टाचार निरोधक संस्था लोकपाल ने इन दावों को 'अनुमान और कल्पना' करार दिया, जो किसी वेरिफाई किए जा सकने वाली जानकारी पर आधारित नहीं थे। यह जानकारी समाचार एजेंसी पीटीआई ने दी।

 

जस्टिस ए. एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली लोकपाल की छह सदस्यीय बेंच ने कहा कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को माधवी पुरी बुच के खिलाफ कार्रवाई की मांग का एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता। बेंच ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा सहित अन्य शिकायतकर्ताओं की शिकायतों को खारिज कर दिया। लोकपाल ने बताया कि शिकायतें हिंडनबर्ग की उस रिपोर्ट पर आधारित थीं, जिसे एक 'ज्ञात शॉर्ट-सेलर ट्रेडर' ने तैयार किया था, जिसका मकसद अदाणी समूह को निशाना बनाना था।

 

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लगे थे पांच आरोप

माधवी पुरी बुच ने 2 मार्च 2022 को सेबी प्रमुख का पद संभाला था और इस साल 28 फरवरी को अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद इस्तीफा दे दिया था। पिछले साल नवंबर में लोकपाल ने उनके खिलाफ शिकायतों पर स्पष्टीकरण मांगा था। शिकायतकर्ताओं ने मौखिक और लिखित तर्कों में पांच आरोप लगाए थे, लेकिन सबूतों के अभाव में इन्हें खारिज कर दिया गया।

 

10 अगस्त 2024 को प्रकाशित हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि माधवी पुरी बुच और उनके पति की कुछ ऑफशोर फंड्स में हिस्सेदारी थी, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर अदाणी समूह से जुड़े मनी-साइफनिंग घोटाले में किया गया। बुच और उनके पति ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शॉर्ट-सेलर ने सेबी की विश्वसनीयता पर हमला किया है और उनकी छवि खराब करने की कोशिश की है। अदाणी समूह ने भी इन आरोपों को दुर्भावनापूर्ण और गिनी-चुनी जानकारी के हेरफेर पर आधारित बताया था।

 

कहा- ठोस सबूतों का अभाव

लोकपाल ने अपने फैसले में कहा कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में कोई ठोस सबूत नहीं थे, जो बुच के खिलाफ कार्रवाई को जायज ठहरा सकें। बेंच ने शिकायतों को 'अनुमानों और मान्यताओं' पर आधारित मानते हुए खारिज कर दिया। इस साल जनवरी में हिंडनबर्ग रिसर्च के संस्थापक नाथन एंडरसन ने अपनी फर्म को बंद करने की घोषणा की थी, जिसके बाद इस रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर और सवाल उठे।

 

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यह फैसला सेबी की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर चल रही बहस के बीच आया है। कुछ एक्सपर्टस का मानना है कि माधवी पुरी बुच के कार्यकाल के दौरान सेबी ने कई महत्वपूर्ण सुधार किए, जिनमें पूंजी बाजार को मजबूत करना और निवेशकों का विश्वास बढ़ाना शामिल था। हालांकि, हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ने उनके कार्यकाल को विवादों में घेरने की कोशिश की थी।

 

इस बीच, अदाणी समूह ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि यह उनके खिलाफ लगाए गए गलत आरोपों का जवाब है।

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