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FD के चक्कर में परेशान कर देते हैं देश के बड़े बैंक, RBI की रिपोर्ट ने खोली पोल

आरबीआई की 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार एसबीआई पर सबसे ज्यादा एफडी शिकायतें हैं, जबकि प्राइवेट बैंकों में पेनल्टी और तकनीकी विवाद तेजी से बढ़ रहे हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Social Media

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हाल ही में हरियाणा सरकार के कुछ बैंक खातों को लेकर बड़ी गड़बड़ी सामने आई। IDFC बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक में जमा कराए गए सरकारी पैसे गलत तरीके से निकाल लिए जाने के चलते बैंक में किए जाने वाले फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को लेकर कई तरह से सवाल खड़े होने लगे हैं। इसी बीच एक रिपोर्ट ने निवेशकों की परेशानी बढ़ा दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कई बड़े ऐसे हैं जिनसे पास सिर्फ FD से ही जुड़ी लाखों शिकायतें आ रही हैं।

 

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की 'एनुअल रिपोर्ट ऑफ ओम्बुड्समैन स्कीम्स 2025-26' की ताजा रिपोर्ट ने बैंकिंग सेक्टर की एक बड़ी परेशानी सामने ला दी है। इस सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, देश के तीन सबसे बड़े बैंकों स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), HDFC और ICICI के बीच फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) को लेकर शिकायतों की बाढ़ आ गई है। इसमें सबसे खराब रिकॉर्ड SBI का रहा है, जिसके खिलाफ अकेले ही 6.8 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई हैं। इन शिकायतों में सबसे बड़ा मुद्दा एफडी का समय पूरा होने पर पैसा मिलने में देरी होना और ब्याज दरों को लेकर होने वाली गड़बड़ी है।

 

अगर हम आंकड़ों के हिसाब से तुलना करें तो SBI के ग्राहकों की संख्या और उसकी पहुंच ज्यादा होने के चलते उसके पास आने वाले शिकायतों की संख्या भी सबसे ज्यादा है। इस मामले में प्राइवेट बैंक भी अब पीछे नहीं रहे हैं। आरबीआई की रिपोर्ट बताती है कि HDFC और ICICI बैंक के खिलाफ शिकायतों में इस साल करीब 11% से 12% की बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट में यह अंतर साफ दिखता है कि जहां SBI में लोग कागजी कार्यवाही की सुस्ती और स्टाफ के बर्ताव से परेशान हैं, वहीं एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक के ग्राहकों को मोबाइल ऐप की तकनीकी खराबी और बिना बताए खाते से पैसा कटने जैसी मॉडर्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

 

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किन समस्याओं से जूझते हैं ग्राहक?

इन तीनों बैंकों में सबसे ज्यादा झगड़ा 'प्रि-मैच्योर विड्रॉल' यानी समय से पहले एफडी तोड़ने को लेकर होता है। ग्राहक अक्सर शिकायत करते है कि बैंकों ने उन्हें छिपे हुए चार्जेस (Hidden Charges) के बारे में नहीं बताया था। दूसरी बड़ी समस्या नॉमिनी को लेकर आती है। परिवार के किसी सदस्य की मौत के बाद बैंक वाले चक्कर कटवाते हैं और ऐसे कागजात मांगते हैं जो आम आदमी के पास नहीं होते।

 

इसके अलावा, आईसीआईसीआई (ICICI) और एचडीएफसी (HDFC) जैसे बैंकों में कई मामले ऐसे भी आए हैं जहां बैंक ने बिना पूछे एफडी को 'ऑटो-रिन्यू' कर दिया, जिससे ग्राहक को जरूरत पड़ने पर अपना पैसा निकालने में दिक्कत हुई।

 

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किन सुधारों की है जरूरत?

आरबीआई की इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि पूरे बैंकिंग सिस्टम में एफडी और बैंक खातों से जुड़ी शिकायतें अब 17% तक पहुंच गई हैं, जो कि काफी बड़ी बात है। रिपोर्ट में इन तीनों बड़े बैंकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपना काम करने का तरीका साफ रखें और एफडी के सभी नियमों को एकदम आसान भाषा में लिखें, ताकि कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी उसे बिना किसी परेशानी के समझ सके।

 

कुल मिलाकर देखें तो जहां SBI को अपनी पुरानी और सुस्त व्यवस्था को सुधारकर नया बनाने की जरूरत है, वहीं एचडीएफसी और आईसीआईसीआई जैसे प्राइवेट बैंकों को अपनी ऑनलाइन सुरक्षा और ग्राहकों से बातचीत के तरीके को बेहतर बनाना होगा, ताकि लोगों का भरोसा उन पर हमेशा बना रहे।

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